वाराणसी, 24 मार्च। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक बार फिर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का परचम लहराया है। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा में सहायक संग्रहालयाध्यक्ष पद के लिए चयनित कुल 10 अभ्यर्थियों में से 7 विद्यार्थी इसी विश्वविद्यालय से जुड़े होने पर विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष और गौरव का वातावरण है।
विश्वविद्यालय के पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम से जुड़े इन विद्यार्थियों की सफलता न केवल संस्थान की सुदृढ़ शैक्षणिक परंपरा का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यहां प्रदान की जा रही शिक्षा प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए कितनी प्रभावी है।
चयनित अभ्यर्थियों में शानु आनन्द (2017–18), सुजीत कुमार तिवारी (2018–19), अमित रंजन, सुधा सिंह (2020–21), सुमन कुमारी (2018–19), दिलीप कुमार (2009–10) एवं विवेक शुक्ल (2020–21) शामिल हैं। ये सभी विद्यार्थी विश्वविद्यालय के पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान पाठ्यक्रम से अध्ययनरत रहे हैं अथवा वर्तमान में अध्ययन कर रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनके सतत परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय बल्कि समूचे शैक्षणिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है और अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।
कुलपति ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुदृढ़ मार्गदर्शन और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि वे विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. राजनाथ, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. विमल कुमार एवं अभियंता रामविजय सिंह सहित समस्त विश्वविद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त करते हुए चयनित विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही विश्वास जताया कि ये विद्यार्थी देश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।









