वाराणसी। हिंदी भाषा, साहित्य एवं देवनागरी लिपि के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित देश की अग्रणी संस्था नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस के अवसर पर काशी की पत्रकारिता के पुरोधा एवं उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड की हिंदी पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकार स्व. चक्रवर्ती गणपति नावड का तैलचित्र नागरी प्रचारिणी सभा को विधिवत समर्पित किया गया।
आयोजित समारोह में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, भारत कला भवन के निदेशक प्रो. रूपराय चौधुरी तथा उप निदेशक निशांत की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर स्व. नावड के व्यक्तित्व एवं पत्रकारिता जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
स्व. चक्रवर्ती गणपति नावड के पुत्र चक्रवर्ती विजय नावड ने भावुक होते हुए कहा कि उनके लिए यह अत्यंत गौरव और सौभाग्य का क्षण है कि उनके पूज्य पिता का तैलचित्र साहित्य और संस्कृति के इस प्रतिष्ठित केंद्र में अनेक महान विभूतियों के बीच स्थापित हुआ है। उन्होंने नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधान-मंत्री व्योमेश शुक्ल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की तथा कामना की कि सभा हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में निरंतर नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर देशभर में अपनी गौरवशाली परंपरा को और अधिक समृद्ध करे।

समारोह में उपस्थित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों ने स्व. चक्रवर्ती गणपति नावड की पत्रकारिता, सामाजिक सरोकारों और हिंदी के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।








