वाराणसी। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649वें जन्मोत्सव के अवसर पर राजघाट स्थित संत रविदास मंदिर में चार दिवसीय समारोह का भव्य शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। उद्घाटन अवसर पर डॉ. अंशुल अविजीत एवं रतनलाल भगत ने मंदिर परिसर में स्थापित गुरु रविदास जी की प्रतिमा पर चादर चढ़ाकर एवं मत्था टेककर नमन किया।
इस अवसर पर मंदिर के पुजारी रामविलास दास ने गुरु महिमा के पदों का सुमधुर गायन किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। मुख्य वक्ता डॉ. अंशुल अविजीत ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु रविदास जी का संपूर्ण जीवन छुआछूत, भेदभाव और जातिगत विषमता के विरुद्ध संघर्ष का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भी गुरु रविदास जी के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। गुरु रविदास ने जात-पात की दीवारों को तोड़कर समतामूलक, न्यायपूर्ण और मानवीय समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
रतनलाल भगत ने कहा कि काशी में स्थित यह संत रविदास मंदिर सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है और गुरु रविदास जी के सामाजिक उद्घोषों का सजीव स्वरूप है। उन्होंने इसे बाबू जगजीवन राम के सतत प्रयासों और सामाजिक चेतना का प्रतिबिंब बताया।

समारोह के दौरान भक्त मंडली द्वारा गुरु रविदास जी के पदों का संगीतमय पाठ लगातार चलता रहा। साथ ही आयोजित विशाल भंडारे में रात्रि पर्यंत हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से कनाडा से पधारे डॉ. वाली दास, डॉ. जयशंकर जय, गोरखनाथ, हारूमोहन चक्रवर्ती, मनोज कुमार, वीरेंद्र कुमार बबलू सहित देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मंदिर प्रबंधक मदन भगत ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।










