वाराणसी, १५ अप्रैल २०२६। सनातन धर्म और गौ-संरक्षण को लेकर एक व्यापक जनांदोलन की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में प्रस्तावित ८१ दिवसीय ‘गविष्ठि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा’ पूरे उत्तर प्रदेश में जनजागरण का नया अध्याय लिखने को तैयार है। यह यात्रा प्रदेश की सभी ४०३ विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी और समाज के विभिन्न वर्गों को गौ-रक्षा के लिए संगठित करेगी।
यह ऐतिहासिक यात्रा ३ मई से प्रारंभ होकर २४ जुलाई २०२६ तक निरंतर चलेगी। यात्रा का नेतृत्व स्वयं शंकराचार्य जी महाराज एवं गौ-गंगा कृपाकांक्षी पूज्य श्री गोपाल ‘मणि’ जी करेंगे, जबकि इसके संयोजन की जिम्मेदारी दंडी संन्यासी शिष्य स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानन्द गिरि जी को सौंपी गई है।
यात्रा के माध्यम से न केवल धार्मिक चेतना को सुदृढ़ किया जाएगा, बल्कि गौ-रक्षा को लेकर ठोस सामाजिक ढांचा भी खड़ा करने का संकल्प लिया गया है। आयोजन समिति के अनुसार इस दौरान प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ‘गौधाम’ स्थापित करने की योजना है, जिससे गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को स्थायी आधार मिल सके।
इसके साथ ही हर गांव और मोहल्ले में ‘५ गौ वीरों’ की नियुक्ति कर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा तंत्र विकसित करने की भी पहल की जाएगी। यात्रा के दौरान गौशालाओं और बूचड़खानों की वास्तविक स्थिति का विस्तृत आंकलन किया जाएगा, ताकि भविष्य की नीतियों और योजनाओं को दिशा मिल सके।

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज के लोगों को ‘गौमतदाता’ के रूप में जागरूक करना भी है, जिससे गौ-रक्षा का मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ सके। आयोजन समिति का मानना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्जागरण का माध्यम बनेगी।
८१ दिवसीय इस महायात्रा का भव्य समापन २४ जुलाई २०२६ को लखनऊ स्थित मान्यवर श्री कांशीराम जी सांस्कृतिक स्थल (स्मृति उपवन) में होगा, जहां एक विशाल धर्मसभा आयोजित की जाएगी। इस समापन समारोह में प्रदेश भर से लाखों गौ-भक्तों के जुटने की संभावना है।
शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर के धर्मप्रेमियों और गौ-भक्तों से तन-मन-धन से सहयोग करने और यात्रा से जुड़ने की अपील की गई है।









