मुंबई। देश के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार अनिल अंबानी एक बार फिर वित्तीय संकट और कानूनी कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में हैं। विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बकाया कर्ज की वसूली के क्रम में उनकी करीब ₹3034 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को कुर्क (अटैच) करने की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। यह कार्रवाई कर्ज अदायगी में लगातार चूक (डिफॉल्ट) और लंबित मामलों के चलते की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में मुंबई और अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थित लग्जरी फ्लैट, आलीशान आवासीय परिसंपत्तियां, वाणिज्यिक संपत्तियां और फार्महाउस शामिल हैं। इन संपत्तियों को बैंकों के कंसोर्टियम और प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चिन्हित कर कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कर्ज वसूली अधिकरण (DRT) और अन्य सक्षम प्राधिकरणों के आदेश के बाद की गई, जिसमें बैंकों को अपनी बकाया राशि की रिकवरी के लिए संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति दी गई।

अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस एडीए समूह की कई कंपनियां बीते वर्षों में भारी कर्ज और घाटे से जूझती रही हैं। दूरसंचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में निवेश के बावजूद अपेक्षित रिटर्न न मिलने से वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती गई।
इससे पहले भी उनके खिलाफ कई बैंकों द्वारा वसूली की कार्रवाई और अदालतों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कानूनी विवाद सामने आए थे, जिससे उनकी कारोबारी साख पर असर पड़ा।
एक समय था जब अनिल अंबानी देश के सबसे धनी उद्योगपतियों में गिने जाते थे, लेकिन बदलते बाजार, कर्ज का बढ़ता बोझ और कारोबारी असफलताओं ने उनके साम्राज्य को गंभीर संकट में डाल दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई भारतीय बैंकिंग प्रणाली द्वारा बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्ती का संकेत है, जिससे भविष्य में कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिल सकता है।









