वाराणसी। चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) की ओर से संस्था की संस्थापक स्मृतिशेष चंद्रावती नरेश जयंती के अवसर पर चितईपुर स्थित इंदिरा नगर कार्यालय प्रांगण में कवि इंजी. राम नरेश “नरेश” के भोजपुरी गीत संग्रह “मड़ये की हरदी” का भव्य लोकार्पण एवं सम्मान समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भोजपुरी लोकधारा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. अत्रि भारद्वाज तथा अध्यक्षता कर रहे डॉ. श्रद्धानंद द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद माँ सरस्वती एवं स्मृतिशेष चंद्रावती नरेश के चित्र पर पुष्पार्पण किया गया। सुप्रसिद्ध कत्थक कलाकार संदीप मौर्या ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. राम नरेश “नरेश” ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने भोजपुरी भाषा, लोकसंस्कृति और गीत परंपरा के संरक्षण में “मड़ये की हरदी” को महत्वपूर्ण कृति बताते हुए कहा कि यह संग्रह जीवन के सुख-दुःख, संघर्ष और संवेदनाओं को सहज लोकभाषा में अभिव्यक्त करता है तथा मनुष्य को विषम परिस्थितियों में भी मुस्कुराकर जीने की प्रेरणा देता है।

वक्ताओं ने कहा कि कवि इंजी. राम नरेश “नरेश” की यह रचना भोजपुरी साहित्य जगत में मील का पत्थर साबित होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकसाहित्य की अमूल्य धरोहर बनेगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेंद्र नाथ तिवारी ‘अलंकार’ एवं नाथ सोनांचली ने संयुक्त रूप से किया।
समारोह में लगभग 70 रचनाकारों को अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह तथा महापुरुषों के चित्र प्रदान कर ‘चंद्रा साहित्य गौरव’ एवं ‘साहित्यिक पुरोधा’ सम्मान से सम्मानित किया गया। पुस्तक लोकार्पण समारोह में काशी एवं पूर्वांचल के बड़ी संख्या में ख्यातिलब्ध कवि, कवयित्रियाँ, साहित्यकार, पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









