वाराणसी। भारत विकास परिषद् काशी प्रदेश प्रान्त उत्तर मध्य क्षेत्र-द्वितीय की नीलकण्ठ शाखा द्वारा स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर आर्य समाज भोजूबीर में यज्ञ एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों, सामाजिक समरसता और स्वदेशी आंदोलन में उनके योगदान को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ के साथ हुआ। शाखाध्यक्ष रवि प्रकाश बरनवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वीर सावरकर ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए समाज में एकता, जागरूकता और आत्मसम्मान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सावरकर सामाजिक उत्थान एवं दलितों के मंदिर प्रवेश के प्रबल समर्थक थे तथा हिंदू समाज के संगठन के लिए निरंतर कार्य करते रहे।
इस अवसर पर प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ ने सावरकर के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन द्वारा दो आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने पर भी उनका मनोबल अटूट रहा। उन्होंने बताया कि सावरकर ने उस समय भी निर्भीकता के साथ अपने विचार व्यक्त किए और राष्ट्रभक्ति की मिसाल प्रस्तुत की।

चंद्रदीप आर्य ने कहा कि सावरकर ने वर्ष 1909 में ब्रिटेन में वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन ब्रिटिश सत्ता के प्रति निष्ठा की शपथ स्वीकार न करने के कारण उन्होंने प्रमाण पत्र लेना उचित नहीं समझा। यह उनके स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक था।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। अंत में राष्ट्रहित एवं विश्व कल्याण की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।









