वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग में शनिवार को ‘1857 का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम : एक अवलोकन’ विषयक एक दिवसीय विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के इतिहास विभाग के प्रो. विघ्नेश कुमार ने कहा कि उपनिवेशवादी इतिहासकारों ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को लेकर अनेक भ्रांतियां फैलाकर इसे क्रांति के बजाय ‘गदर’ का रूप देने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि 1857 का विद्रोह पूरी तरह सुनियोजित और संगठित क्रांति थी। मेरठ में क्रांति से दो दिन पूर्व दीवारों पर इश्तिहारों का चिपका मिलना इसकी पूर्व योजना और संगठन का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस संग्राम में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने सक्रिय भागीदारी की थी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजु सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रविंद्र कुमार गौतम ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. सारिका गौतम, डॉ. वीरेंद्र प्रताप, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ. संदीप कुमार सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह सहित विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।











