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वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में ऐतिहासिक शुभारंभ 

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चमोली (उत्तराखंड), 23 अप्रैल। विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार को वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक आस्था के भव्य वातावरण में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। प्रातः निर्धारित शुभ मुहूर्त 6:15 बजे, वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर कपाट उद्घाटन की प्रक्रिया सम्पन्न हुई।

इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में विधिवत द्वार पूजन और पंचांग पूजन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न कराया गया। कपाट खुलने से पूर्व मंदिर परंपराओं के अनुसार ‘नर पूजा’ की जिम्मेदारी रावल जी द्वारा निभाई गई।

कार्यक्रम में पुष्कर सिंह धामी सहित मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। इस वर्ष लगातार चौथी बार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

शंकराचार्य जी ने अपने संबोधन में कहा कि कपाट खुलने के साथ ही देश-विदेश के सनातन धर्मावलंबियों के लिए अगले छह माह तक भगवान बदरी विशाल के दर्शन का दुर्लभ अवसर उपलब्ध रहेगा, जिससे श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 12 सितंबर 2022 को ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए थे और तब से निरंतर धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इस अवसर पर स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती, स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि, स्वामी श्रीनिधिरव्यानन्द सागर, स्वामी अप्रमेयशिवसाक्षात्कृतानन्द गिरि सहित अनेक संत-महात्मा एवं प्रमुख श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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