वाराणसी, 21 मार्च 2026। काशी की सांस्कृतिक आत्मा और भारत रत्न से सम्मानित शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान की 110वीं जयंती के अवसर पर सिगरा स्थित फरमान दरगाह में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने दरगाह पहुंचकर उनकी मजार पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया।
इस अवसर पर अजय राय ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान केवल एक महान शहनाई वादक ही नहीं, बल्कि काशी की पहचान और गंगा-जमुनी तहज़ीब के जीवंत प्रतीक थे। उनकी शहनाई की मधुर धुनों ने काशी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका काशी और माँ गंगा से गहरा आध्यात्मिक संबंध था—वे अक्सर गंगा किनारे बैठकर घंटों रियाज़ किया करते थे, जिसकी झलक उनकी साधना और सुरों में स्पष्ट रूप से महसूस होती थी।
उन्होंने कहा कि बिस्मिल्लाह ख़ान का संपूर्ण जीवन गंगा-जमुनी तहज़ीब को सहेजने और मजबूत करने के लिए समर्पित रहा। उन्हें होली और ईद दोनों पर्वों से समान लगाव था और वे सभी धर्मों के प्रति समान आस्था रखते थे। उनकी शहनाई की धुनें केवल संगीत नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और इंसानियत का संदेश थीं। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से यह सिद्ध किया कि काशी की असली पहचान उसकी साझा संस्कृति, आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता में निहित है। इस दौरान उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों ने भी उनकी मजार पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और काशी की इस महान विभूति को शत-शत नमन किया।

प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, सफक रिजवी, प्रिंस राय खगोलन, शकील जादूगर, विश्वनाथ कुँवर, किशन यादव सहित अनेक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक शामिल थे।









