झूंसी, प्रयागराज। आस्था, अनुष्ठान और सेवा की त्रिवेणी में डूबे माघ मेले में इस बार महाशिवरात्रि पर्व विशेष आध्यात्मिक आभा के साथ मनाया जाएगा। अखिल भारतीय वनिता आश्रम भारतीय दर्शन एवं संस्कृति संस्थान ट्रस्ट, कानपुर द्वारा संचालित माघ मेला शिविर का समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य शिव महाशक्ति महायज्ञ एवं हवन पूर्णाहुति तथा विशाल भंडारे के साथ होगा।
उत्तरी पटरी काली सड़क, सेक्टर संख्या-5 स्थित माघ मेला क्षेत्र में 3 जनवरी से प्रारंभ हुआ यह आध्यात्मिक शिविर निरंतर अनुष्ठान, सत्संग और सेवा कार्यों का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन आयोजित हो रहे महायज्ञ में लाखों की संख्या में आहुतियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धा के स्वर से गुंजायमान है।
शिविर व्यवस्थापक महंत ऋषि स्वरूप महाराज ने बताया कि ट्रस्ट पिछले 40 वर्षों से माघ मेले में एक माह तक आध्यात्मिक एवं सेवा कार्यों का संचालन करता आ रहा है। आम जनमानस के कल्याण की भावना से प्रेरित होकर प्रतिदिन महायज्ञ, सत्संग, हवन एवं भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु सहभागिता कर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

माघ मेले की अवधि समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ जहां अनेक संस्थाएं अपने-अपने स्थलों को लौट चुकी हैं, वहीं यह आश्रम महाशिवरात्रि तक निरंतर सेवा और साधना का केंद्र बना हुआ है। विशेष रूप से गरीबों एवं असहायों के लिए प्रतिदिन भरपेट भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही संगम स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को निशुल्क आवास सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
महाशिवरात्रि के दिन होने वाली पूर्णाहुति को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार 15 फरवरी को प्रातःकाल से वैदिक विधि-विधान के साथ महायज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न होगी, जिसके उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
आस्था और सेवा के समन्वय से संचालित यह शिविर न केवल धार्मिक अनुष्ठान का केंद्र है, बल्कि समाजसेवा की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत कर रहा है। महाशिवरात्रि पर होने वाला यह समापन समारोह माघ मेले की आध्यात्मिक यात्रा का एक ऐतिहासिक अध्याय बनने जा रहा है।









