वाराणसी। शहर को पूरी तरह रेबीज मुक्त बनाने की दिशा में नगर निगम वाराणसी ने वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के साथ एक ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत ऐढ़े स्थित नगर निगम के पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्र को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप उसका संचालन किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की ओर से 50 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) निवेश किया जाएगा। वेदांता समूह की पशु कल्याण पहल ‘टाको प्रोजेक्ट’ के माध्यम से इस केंद्र का संचालन अगले 15 वर्षों तक किया जाएगा। यह साझेदारी सार्वजनिक स्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा और पशु कल्याण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
एमओयू पर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और फाउंडेशन की प्रेसिडेंट रितु झिंगन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। समझौते के तहत केंद्र में एनीमल बर्थ कंट्रोल रूल्स-2023 के प्रावधानों के अनुसार आवारा कुत्तों की वैज्ञानिक पद्धति से नसबंदी और व्यापक स्तर पर एंटी-रेबीज टीकाकरण किया जाएगा।

टाको प्रोजेक्ट की एंकर प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पशुओं और समाज के बीच संतुलित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना है। वहीं नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इसे शहर के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। परियोजना का लक्ष्य वाराणसी को पूरी तरह रेबीज मुक्त बनाकर देश का एक पशु-संवेदनशील मॉडल शहर स्थापित करना है।










