मीरजापुर। महोखर ग्राम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कथा व्यास आचार्य सच्चिदानन्द जी महाराज ने भागवत महात्म्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चेतना के साथ सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन का संदेश दिया।
महाराज जी ने कहा कि जब तक घर के पितर प्रसन्न नहीं होते, तब तक देवताओं की कृपा भी पूर्ण नहीं होती। मनुष्य को अपने जीवन में यह आत्ममंथन अवश्य करना चाहिए कि उसने पृथ्वी, समाज और मानवता के कल्याण के लिए क्या योगदान दिया है। जीवन केवल स्वयं के सुख के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के हित और कल्याण के लिए भी समर्पित होना चाहिए।
कथा के दौरान उन्होंने संत, चित और आनंद के स्वरूप तथा उनसे जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाएं मनुष्य को क्षणिक प्रसन्नता तो दे सकती हैं, लेकिन स्थायी शांति और आत्मिक संतोष भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में ही प्राप्त होता है। भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को सद्मार्ग पर चलने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देता है। कथा के भावपूर्ण प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।










