नौगढ़, चन्दौली। नौगढ़ बाजार स्थित दुर्गा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा वाचिका राघव प्रिया ने भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म तक की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस दौरान पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर रहा।
कथा वाचिका राघव प्रिया ने बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ के पास वैभव और ऐश्वर्य की कमी नहीं थी, लेकिन संतान सुख से वंचित होने के कारण वे चिंतित रहते थे। रघुकुल की परंपरा को आगे बढ़ाने की चिंता लेकर राजा दशरथ ने अपने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ से मार्गदर्शन मांगा। उनके परामर्श पर महर्षि ऋष्यशृंग के नेतृत्व में पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद अग्निदेव ने राजा दशरथ को दिव्य खीर प्रदान की, जिसे उन्होंने अपनी तीनों रानियों में वितरित किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके फलस्वरूप महारानी कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम, कैकेयी के गर्भ से भरत तथा सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चारों राजकुमारों के जन्म से अयोध्या में उत्सव छा गया। महल से लेकर नगर की गलियों तक मंगलगीत गूंजने लगे और पूरी अयोध्या खुशियों से सराबोर हो उठी।

राघव प्रिया ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, मर्यादा, धर्म और कर्तव्य पालन का अनुपम उदाहरण है। श्रीराम कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा भी है। प्रभु श्रीराम का चरित्र सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण वातावरण में श्रोताओं ने कथा का आनंद लिया। नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आयोजन से दुर्गा माता मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास बना हुआ है।










