बड़ागांव (वाराणसी)। बड़ागांव थाना क्षेत्र के चिलबिला गांव निवासी सुशील कुमार पाण्डेय ने जौनपुर के सुरेरी थाना पुलिस और अपने एक पड़ोसी पर साजिश के तहत अपहरण करने, अवैध असलहा देकर फर्जी मुकदमे में फंसाने तथा धमकी देकर रुपये वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। पुलिस कमिश्नरेट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए मामले की जांच एसीपी पिंडरा को सौंपी है।
शिकायत के मुताबिक, 13 सितंबर की सुबह सुशील कुमार घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित मंदिर में पूजा करने जा रहे थे। इसी दौरान उनके पड़ोसी राजेंद्र दुबे ने फोन कर उन्हें हाईवे पर मिलने के लिए बुलाया। आरोप है कि वहां पहुंचने पर तीन-चार लोग आए और खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए उन्हें जबरन कार में बैठाकर जौनपुर के सुरेरी थाने ले गए। पीड़ित का आरोप है कि सभी लोग सादे कपड़ों में थे और उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं था।
सुशील कुमार का आरोप है कि सुरेरी थाने में पुलिसकर्मियों ने उनके हाथ में अवैध असलहा थमाकर जबरन वीडियो बनाया, ताकि बाद में उसे उनके कब्जे से बरामदगी के तौर पर प्रस्तुत किया जा सके। इसके अलावा सादे कागजों पर भी जबरन हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में बताया गया है कि एनडीपीएस एक्ट और अवैध असलहे के मामले में जेल भेजने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की मांग की गई। भयभीत होकर पीड़ित ने परिजनों से संपर्क किया। आरोप के अनुसार, इसके बाद 1.05 लाख रुपये नकद तथा 60,299 रुपये यूपीआई के जरिए तीन किस्तों में वंशनारायण गिरी के खाते में ट्रांसफर कराए गए। ऑनलाइन भेजी गई रकम में 55 हजार, पांच हजार और 299 रुपये शामिल हैं।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि रकम लेने के बाद उसे शिकायत करने पर वीडियो वायरल करने तथा परिवार के सदस्यों को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। पैर में गोली मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
सुशील कुमार ने पुलिस कमिश्नरेट से 13 सितंबर को सुरेरी थाने की सीसीटीवी फुटेज और कथित वीडियो को सुरक्षित कराने, राजेंद्र दुबे सहित संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण, अवैध वसूली और कथित फर्जी साक्ष्य तैयार करने के आरोपों की जांच कर एफआईआर दर्ज करने तथा अपने खिलाफ दर्ज कथित फर्जी मुकदमे को निरस्त कर रकम वापस दिलाने की मांग की है। मामले की जांच एसीपी पिंडरा द्वारा की जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।










