वाराणसी, 14 अगस्त। श्रावण शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर शुक्रवार को काशी सहित देशभर में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज एवं ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का 57वां प्राकट्य महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। काशी के शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में संतों, दंडी संन्यासियों, वैदिक आचार्यों और श्रद्धालुओं ने विविध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर शंकराचार्य जी के दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की मंगलकामना की।
महामहोत्सव का शुभारंभ वैदिक आचार्यों द्वारा विधिविधान से रुद्राभिषेक के साथ हुआ। इसके बाद श्रीविद्यामठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद जी के नेतृत्व में भक्तों ने धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज एवं शंकराचार्य जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन किया। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी की चरण पादुकाओं का विधिवत पूजन भी किया। इस अवसर पर सैकड़ों दंडी संन्यासियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
महिलाओं ने भजन-कीर्तन और सोहर गाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। भक्ति और उल्लास के बीच महिलाओं ने नृत्य भी किया। श्रीविद्यामठ में दिनभर चले महाभंडारे में बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा में शंकराचार्य जी का चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान चल रहा है। वहां देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी प्राकट्य दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया। इस दौरान शंकराचार्य जी का 57 अलग-अलग वस्तुओं से अर्चन किया गया तथा फल, अनाज, मिष्ठान, रबड़ी और सूखे मेवों से तुलादान किया गया। शंकराचार्य जी ने परंपरागत पूजन संपन्न कर भक्तों को आशीर्वचन प्रदान किया।

वहीं ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम में प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुन्दानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य में भी विविध धार्मिक आयोजन हुए और शंकराचार्य जी के दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की गई।
प्राकट्य दिवस के अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों, चारों धामों, सप्तपुरियों सहित देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान कर शंकराचार्य जी के दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। इस दौरान उनके धर्म, संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों को भी स्मरण किया गया।
श्रीविद्यामठ में आयोजित कार्यक्रम में दंडी संन्यासियों, वैदिक आचार्यों, बटुक विद्यार्थियों के साथ जयंतु जय शास्त्री, हजारी कीर्ति शुक्ला, हजारी सौरभ शुक्ला, विमलेश तिवारी, रमेश पाण्डेय, लता पाण्डेय, सावित्री पाण्डेय, चांदनी चौबे, माधुरी पाण्डेय, नीलम दुबे सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।










