वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाज कार्य विभाग का 80वां स्थापना दिवस स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को प्रो. राजाराम शास्त्री सभागार में समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में सामाजिक सरोकारों, महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति, बाल कल्याण, दिव्यांगजन कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर मंथन हुआ।
मुख्य अतिथि कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए सरकार और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने समाज कार्य के विद्यार्थियों से सामाजिक बदलाव में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
अध्यक्षता करते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. सुधीर शुक्ला ने कहा कि समाज कार्य विभाग काशी विद्यापीठ की गौरवशाली परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान समय में नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियों से निपटने में समाज कार्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना सिन्हा ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को स्थापित समाज कार्य विभाग 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। विभाग ने समाजसेवा, शोध और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में निरंतर योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से सैद्धांतिक ज्ञान के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का वाहक बनने का आह्वान किया। प्रो. बंशीधर पाण्डेय ने विभाग की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। जन विकास समिति की अंजू देवी एवं सीमा सिंह ने महिला स्वरोजगार और नशामुक्ति, वन स्टॉप सेंटर की रश्मि दुबे ने महिला हिंसा के पीड़ितों को त्वरित सहायता, अस्मिता संस्था के माजु ने बालिका शिक्षा तथा मानव सेवा संघ के डॉ. भानुजा एवं शरणलाल ने वृद्ध सेवा को सामाजिक दायित्व बताया। एशियन ब्रिज विज फाउंडेशन के मो. मूसा आजमी ने दिव्यांगजनों के कौशल विकास, ज्ञान चांद मुरब्बा मंडित बाल विद्यालय की डॉ. अनीता सिंह गौतम ने नैतिक शिक्षा तथा वैश इंडिया के डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता पर जोर दिया।
इस अवसर पर विभागीय शिक्षकों द्वारा न्यूजलेटर 2025-26 का विमोचन किया गया। कर्मठ कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने के साथ शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारती कुरील ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. भावना वर्मा ने दिया।
इस दौरान प्रो. निमिषा गुप्ता, प्रो. शैला परवीन, प्रो. अनिल कुमार चौधरी, प्रो. चन्द्रशेखर सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अश्विनी सिंह, डॉ. आलोक शुक्ला, रंजन तिवारी समेत शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।










