वाराणसी। गो-संसद् ने उत्तर प्रदेश सरकार के गौ-संरक्षण संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए उन्हें वास्तविक स्थिति से अलग बताया है। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सरकार द्वारा प्रकाशित गौ-सेवा संबंधी विज्ञापनों में किए गए दावे जमीनी हालात से मेल नहीं खाते।
गो-संसद् ने विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि सरकारी विज्ञापन में निजी गौशाला की तस्वीर और प्रदेश की स्थानीय नस्ल के बजाय अन्य नस्ल की गाय का चित्र प्रकाशित किया गया है। संगठन ने यह भी दावा किया कि प्रदेश में संचालित गौ-आश्रय केंद्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं है और कई सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
विज्ञप्ति में गौवंश संरक्षण, दुग्ध उत्पादन के सरकारी आंकड़ों तथा गौ-आश्रय स्थलों की व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। साथ ही सरकार से गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने और गौ-संरक्षण के लिए संत समाज के सुझावों को लागू करने की मांग की गई है।
गो-संसद् के प्रतिनिधि पं. देवेन्द्र पाण्डेय ‘गोपजी’ ने घोषणा की कि प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थित सरकारी गौशालाओं की स्थिति का जमीनी स्तर पर निरीक्षण कर वीडियो तैयार किए जाएंगे और उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।

विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय ‘गविष्ठि यात्रा’ के दौरान प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण किया गया। इसी क्रम में संगठन ने ‘अभिनव आशीर्वाद गोधाम’ स्थापना अभियान, शारदीय नवरात्रि में काशी में गो-प्रतिष्ठा यज्ञ तथा दीपावली के बाद लाखों गोवंश के साथ लखनऊ कूच जैसे आगामी कार्यक्रमों की भी घोषणा की।










