वाराणसी। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रभात, शिव बारात समिति, काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति तथा विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को श्री काशी विश्वनाथ वार्षिक कलश यात्रा भव्यता और श्रद्धा के साथ निकाली गई। विशाल शोभायात्रा में 1008 महिलाओं सहित हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर काशी को शिवमय बना दिया।
श्री कांची कामकोटि मठ के सुब्रमण्यम (मणि) के सानिध्य में आयोजित यात्रा में 11 रजत कलशों में दूध तथा देश की विभिन्न पवित्र नदियों—गंगा, सिंधु, ब्यास, झेलम, मानसरोवर, प्रयागराज कुंभ और ऋषिकेश सहित अन्य तीर्थस्थलों का पवित्र जल लेकर भगवान शिव के अभिषेक हेतु ले जाया गया। वहीं 1008 महिलाओं ने गंगा घाट से कलशों में गंगाजल भरकर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ यात्रा में भाग लिया।
कलश यात्रा राजेंद्र प्रसाद घाट से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंची। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ का विशेष जलाभिषेक एवं पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। यात्रा में डमरू दल, आकर्षक झांकियां और पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरे मार्ग में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा, शरबत, जलपान एवं अन्य सेवाओं के माध्यम से भव्य स्वागत किया गया। इससे आयोजन में सेवा, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी दिलीप सिंह एवं निधि देव अग्रवाल ने निर्जला एकादशी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल उपवास का नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तप, संयम और भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, समाजसेवी, श्रद्धालु एवं विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे।









