वाराणसी। देश की अग्रणी रेल इंजन निर्माण इकाई बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) आज केवल आधुनिक लोकोमोटिव निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के क्षेत्र में भी नई मिसाल कायम कर रहा है। वर्ष 1956 में स्थापित बरेका ने 1964 में देश को पहला डीजल-विद्युत रेल इंजन समर्पित किया था और आज यह 11 हजार से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण कर भारतीय रेलवे की प्रमुख उत्पादन इकाइयों में शामिल है।
वर्ष 2017 से बरेका ने ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। भारतीय रेलवे की शत-प्रतिशत विद्युतीकरण नीति और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य के अनुरूप अब यहां मुख्य रूप से उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक इंजन बनाए जा रहे हैं। बरेका निर्मित रेल इंजन भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, तंजानिया, सूडान, सेनेगल और मलेशिया जैसे देशों में भी सेवाएं दे रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए बरेका ने वर्षों पहले ही आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र (IETP) स्थापित किए। बरेका से निकलने वाला कोई भी सीवेज गंगा नदी में नहीं छोड़ा जाता। वर्ष 2025-26 में STP द्वारा 1479 मिलियन लीटर पानी का उपचार किया गया, जबकि औद्योगिक अपशिष्ट संयंत्र में मिश्रित पेट्रोलियम तेल एवं लुब्रिकेंट का सफल पृथक्करण किया गया। सभी मानकों की निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ऑनलाइन प्रणाली से की जाती है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में भी बरेका उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। इस वर्ष 41 नए गहरे रिचार्ज कुओं के निर्माण के साथ परिसर में कुल 71 रिचार्ज कुएं सक्रिय हो चुके हैं, जिससे जल जमाव की समस्या में कमी आने के साथ भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी। उत्कृष्ट जल संरक्षण कार्यों के लिए बरेका को “जल प्रहरी अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण अभियान के तहत कंचनपुर कॉलोनी में 311 लाख लीटर क्षमता वाला जल संचयन तालाब भी विकसित किया गया है।
ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बरेका ने 3.87 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-संलग्न सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 41.87 लाख यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन हुआ, जिससे 3433.89 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई। कुल ऊर्जा खपत में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत रही।
ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में बरेका देश की पहली ऐसी उत्पादन इकाई बनी, जहां SCADA प्रणाली लागू की गई। इसके परिणामस्वरूप डीजल खपत में वर्ष 2024-25 की तुलना में 45.81 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई।
हरित वातावरण को बढ़ावा देने के लिए बरेका परिसर में एक लाख से अधिक पेड़ मौजूद हैं। वर्ष 2025-26 में लगभग चार हजार नए पौधे लगाए गए तथा “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण किया गया। परिणामस्वरूप परिसर का लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र हरित आच्छादन से युक्त हो चुका है और बाहरी क्षेत्रों की तुलना में यहां का तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम महसूस होता है।
बरेका को ISO 14001:2015 सहित ISO 22163, ISO 9001, ISO 50001, ISO 45001 तथा IRIS Silver Level जैसे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं पर्यावरण प्रमाणन प्राप्त हैं। बरेका चिकित्सालय से निकलने वाले बायो-मेडिकल कचरे का निस्तारण भी आधुनिक तकनीक और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।









