वाराणसी। भारत विकास परिषद् काशी प्रदेश प्रान्त उत्तर मध्य क्षेत्र-द्वितीय की नीलकण्ठ शाखा द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं संस्कार निर्माण के उद्देश्य से ब्रह्मकुमारी शिक्षण संस्थान, महमूरगंज में आयोजित पाँच दिवसीय ग्रीष्म कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर योग तथा यज्ञ/हवन के महत्व पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम में बच्चों को सनातन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। शाखा की गतिविधि संयोजक संस्कार आहुति सिंह ने बच्चों को गायत्री मंत्र का अर्थ सहित महत्व समझाते हुए उसके आध्यात्मिक एवं मानसिक लाभों की जानकारी दी।
शाखाध्यक्ष रवि प्रकाश बरनवाल ने यज्ञ को पर्यावरण संरक्षण एवं मानसिक शुद्धि से जोड़ते हुए उसके वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के उच्चारण तथा घी के दीपक के प्रयोग से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मन को शांति एवं एकाग्रता प्राप्त होती है। इस दौरान बच्चों को यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व से संबंधित जानकारी-पत्र भी वितरित किए गए तथा कोरोना काल एवं भोपाल गैस त्रासदी जैसे उदाहरणों के माध्यम से यज्ञ के प्रभाव को समझाया गया।

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान प्रमोद आर्य आर्षेय ने बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हुए बताया कि सच्ची उपासना उसी ईश्वर की करनी चाहिए जिसने सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है। उन्होंने सोहनलाल माहेश्वरी की प्रसिद्ध पंक्तियों “जिसने सूरज चांद बनाया…” के माध्यम से बच्चों को सरल ढंग से ईश्वर की अवधारणा समझाई।
कार्यक्रम में शिक्षण संस्थान की मुख्य शिक्षिका विमला सिंह, शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रान्तीय गतिविधि सह-संयोजक संस्कार पंकज पटेल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में बच्चों को बिस्किट के पैकेट वितरित किए गए।










