वाराणसी। काशी की विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली की भरत मिलाप लीला में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय राय गुरुवार को शामिल हुए। प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के ऐतिहासिक मिलन का दर्शन कर वह भावविभोर हो उठे। उन्होंने प्रभु श्रीराम से देश और प्रदेश की जनता के सुख, समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
इस दौरान अजय राय ने नाटी इमली के भरत मिलाप को काशी की 488 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक लक्खा मेले में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह आयोजन काशी की धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है।
अजय राय ने वाराणसी में आयोजित एयर शो की तिथि को लेकर कहा कि भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस पर देश को गर्व है। एयर शो का आयोजन स्वागत योग्य है और वह सेना के पराक्रम का पूरा सम्मान करते हैं। हालांकि, आयोजन की तिथि तय करते समय काशी की ऐतिहासिक परंपराओं और स्थानीय जनजीवन का ध्यान रखा जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि भरत मिलाप जैसे विश्व प्रसिद्ध आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी के कारण शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में एयर शो की तिथि आगे-पीछे निर्धारित की जा सकती थी, जिससे काशीवासियों और श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता उन्होंने काशी की परंपराओं के सम्मान पर दिया जोर दिया ।
अजय राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के सांसद हैं। ऐसे में काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक आयोजनों और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर कार्यक्रमों की योजना बनाई जानी चाहिए। काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी पहचान है। यहां की परंपराओं का संरक्षण और सम्मान करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भरत मिलाप की लीला प्रेम, त्याग, मर्यादा, समर्पण और पारिवारिक एकता का संदेश देती है। काशी की सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। ऐसे आयोजनों के महत्व को समझते हुए आम नागरिकों की सुविधा और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस अवसर पर महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, मनीष मोरोलिया, ओमप्रकाश ओझा, अमित पाठक, रोहित दुबे, आनंद पांडेय, आशीष गुप्ता, रवि और अश्वनी यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।










