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संविधान दिवस पर काशी विद्यापीठ परिसर में गूंजे संविधान के स्वर, छात्रों ने ली प्रस्तावना की शपथ, रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिता से बढ़ाई देशभक्ति की भावना

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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, महाराजा (डाॅ.) विभूति नारायण सिंह परिसर गंगापुर में बुधवार को संविधान दिवस पर राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्रों और शिक्षकों ने भारतीय संविधान की मूल भावना, मूल्य तथा नागरिकों के दायित्वों को स्मरण करते हुए लोकतांत्रिक चेतना का संदेश दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर प्रभारी डाॅ. मनीष कुमार सिंह ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संविधान विश्व का सबसे व्यापक और समावेशी संविधान है, जिसने सभी वर्गों, जातियों, पंथों और समुदायों के अधिकारों की रक्षा की है। उन्होंने छात्रों से संविधान की भावना को जीवन में लागू करने की अपील की। डॉ. सिंह ने कहा कि “संविधान केवल किताब नहीं, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय चरित्र और नागरिक मर्यादा का दस्तावेज है।”मुख्य वक्ता डॉ. रमेश मिश्रा ने संविधान को राष्ट्र निर्माण की दिशा में मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि मौलिक अधिकार और कर्तव्य नागरिक जीवन की नींव हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम प्रकाश सिंह यादव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेश कुमार ने प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. महेश कुमार ने स्वयंसेवकों को संविधान के नियम-कानून को समझने और उन्हें आचरण में लाने की प्रेरणा दी।इस दौरान डॉ. अर्चना पांडेय ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया, वहीं डॉ. सुमित घोष ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाते हुए सभी प्रतिभागियों को संविधान की प्रस्तावना की शपथ दिलाई।महाविद्यालय की छात्राओं ने रंगोली एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन कर संविधान दिवस को रचनात्मक स्वरूप प्रदान किया। रंग-बिरंगी रंगोलियों और विचारोत्तेजक पोस्टरों ने परिसर के वातावरण को देशभक्ति से भर दिया।कार्यक्रम में अध्यापकगण, स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और संविधान दिवस के इस आयोजन ने परिसर में लोकतांत्रिक एकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति नई चेतना का संदेश दिया।

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