वाराणसी। हनुमान घाट स्थित कांची कामकोटि मंदिर में आयोजित श्री शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा के कण्ठस्थ दंडक्रम पारायण में प्रो. रामनारायण द्विवेदी शामिल हुए। उन्होंने वेदों के संरक्षण में व्याकरण शास्त्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदों की रक्षा के लिए व्याकरण का अध्ययन आवश्यक है। व्याकरण वेद के छह अंगों में से एक है। यह वेदों के शुद्ध उच्चारण, स्वर और पाठ-परंपरा को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रो. द्विवेदी ने पारायण कर रहे बालकों के शुद्ध एवं अनुशासित वैदिक पाठ की सराहना की। उन्होंने बालकों को आशीर्वाद देते हुए वैदिक परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर साधना करने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर पारायण के परीक्षक वेद भास्कर प्रशांत जोशी गुरुजी एवं वेदमूर्ति किरण पाठक गुरुजी उपस्थित रहे। परीक्षार्थी चिरंजीव अद्वैत शैलेंद्र काकड़े और समर्थ शैलेंद्र काकड़े ने अपनी वैदिक साधना एवं अभ्यास का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में कांची मठ के प्रबंधक वीएस सुब्रमण्यम मणि तथा के. वेंकटरमण घनपाठी की भी उपस्थिति रही।
दंडक्रम पारायण का आयोजन महर्षि वेदव्यास संस्थान एवं समर्था द्वैत पाठशाला, त्र्यंबकेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसके संयोजन में वेदमूर्ति शैलेंद्र काकड़े गुरुजी एवं वेदमूर्ति डॉ. गजानन ज्योतकर गुरुजी का विशेष योगदान रहा।











