वाराणसी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा किए जा रहे दावों की पोल लगातार खुलती जा रही है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के सख्त निर्देशों के बावजूद वाराणसी की सड़कें जाम से कराह रही हैं। खासतौर पर लहरतारा पुल क्षेत्र प्रतिदिन भीषण जाम का पर्याय बन चुका है, जिससे आमजन की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पुलिस कमिश्नर ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी तैनात रहेंगे, ताकि यातायात नियंत्रण सुचारू रूप से हो सके। लेकिन लहरतारा चौराहे और आसपास के मार्गों पर जमीनी हालात बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं। सुबह और शाम की पीक आवर्स में यहां वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिससे सैकड़ों वाहन चालक घंटों फंसे रहते हैं।लहरतारा पुल पर ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति भी जाम का बड़ा कारण बनती जा रही है। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों का कहना है कि रोजाना घंटों का समय बर्बाद हो रहा है, जिससे ऑफिस, स्कूल और कारोबार समय पर पहुंचना मुश्किल होता जा रहा है। कई लोगों ने बताया कि पुल के दोनों ओर अव्यवस्थित पार्किंग और मनमाने तरीके से चलने वाले ऑटो-रिक्शा भी जाम की स्थिति को और गंभीर बनाते हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि ट्रैफिक सुधार को लेकर की जाने वाली घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में न तो पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी है और न ही यातायात व्यवस्था के लिए किसी प्रभावी प्लान को लागू किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के बीच बेहतर तालमेल नहीं बनेगा, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है। इधर, शहरवासियों के मन में यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लहरतारा पुल पर बढ़ते जाम ने शहर की यातायात व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है, और लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन जल्द ही कोई ठोस व प्रभावी कार्रवाई करेगा। शहर में बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था अब गंभीर समस्या बन चुकी है और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाना समय की मांग है, ताकि वाराणसी की सड़कों पर सुचारू यातायात बहाल हो सके।









