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‘मन के पंख’ साझा काव्य संग्रह का लोकार्पण, 31 रचनाकारों की सृजन यात्रा को मिला मंच

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चंदौली/वाराणसी। राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित एवं दिनेश चन्द्र संपादित साझा काव्य संग्रह ‘मन के पंख’ का भव्य लोकार्पण रविवार को सेंट अल हनीफ एजुकेशनल सेंटर, सेमरा सभागार में आयोजित समारोह के दौरान हुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए इसे नवोदित एवं स्थापित रचनाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण साहित्यिक मंच बताया।

मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. उत्तमा दीक्षित (डीन, दृश्य कला संकाय, बीएचयू) ने कहा कि साहित्य और कला एक-दूसरे के पूरक हैं तथा ऐसी साझा कृतियां नए रचनाकारों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयां प्रदान करती हैं। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं केंद्रीय तिब्बती संस्थान/विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर प्रो. डॉ. उमेश प्रसाद सिंह ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी चेतना का सशक्त वाहक भी है।

विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी संतोष सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार अखलाक खान ‘भारतीय’, पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिल यादव तथा सेंट अल हनीफ एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन हाजी डॉ. वसीम अहमद ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। वक्ताओं ने कहा कि साझा काव्य संग्रह नए और स्थापित रचनाकारों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराते हैं।

पुस्तक के संपादक दिनेश चन्द्र ने बताया कि ‘मन के पंख’ में देश के 31 कवियों की रचनाओं को स्थान दिया गया है। उन्होंने पुस्तक की प्रकाशन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए सभी सहयोगियों, रचनाकारों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन एवं चेतना साहित्यिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

समारोह के अंत में प्रकाशक डॉ. विनय कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन भविष्य में भी साहित्य की नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

इस अवसर पर शकील अहमद, रामजी प्रसाद भैरव, प्रमोद भृगुवंशी, दीनानाथ देवेश, दयाराम जायसवाल, प्रकाश चौरसिया, झरना मुखर्जी, मुनक्का मौर्य, जयप्रकाश धानापुरी, टीकाराम आचार्य, अरुण आर्य, लवकुश मिश्रा, डॉ. वत्सला, लता सक्सेना, संगीता शिवपुरी, मनोज आनंद, सत्यम, पीयूष मिश्रा, ताहिर वारसी, प्रमोद अग्रहरी, अरुण तिवारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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