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प्राचीन छात्र एसोसिएशन का वार्षिक अधिवेशन सम्पन्न, ‘क्षत्रिय मित्र’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण

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वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज के प्राचीन छात्र एसोसिएशन का वार्षिक अधिवेशन सोमवार को उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ नव रचना कान्वेंट स्कूल के बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना और स्वागत गीत की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य चेतनारायण सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भदोही के मुख्य कोषाधिकारी बृजेश सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर एसोसिएशन की ऐतिहासिक पत्रिका ‘क्षत्रिय मित्र’ के नवीन अंक का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। 1913 से प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2015-16 से पुनः निरंतर वार्षिक अंक के रूप में प्रकाशित हो रही है। इस वर्ष का अंक कॉलेज के संस्थापक राजर्षि उदय प्रताप सिंह के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके शिक्षा दर्शन पर केंद्रित है। वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार की वर्तमान नई शिक्षा नीति राजर्षि जी के शिक्षा-दर्शन से कई स्तरों पर साम्य रखती है। पसमारोह में संस्था के मंत्री डॉ. विनय कुमार सिंह ने वार्षिक प्रतिवेदन और डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने वार्षिक आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि चेतनारायण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 19वीं शताब्दी के अंतिम चरण में राजर्षि उदय प्रताप सिंह पूर्वांचल की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत बनकर उभरे। उन्होंने अभावग्रस्त जनता के लिए शिक्षा के द्वार खोलकर एक नई दिशा प्रदान की। विशिष्ट अतिथि बृजेश सिंह ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए संस्था के 11 मेधावी छात्रों को 5,000 रुपये प्रति छात्र छात्रवृत्ति देने की घोषणा की। वहीं, पीजी कॉलेज के प्रबंधक डॉ. घनश्याम सिंह ने प्राचीन छात्र संगठन की सक्रियता पर प्रसन्नता जताते हुए 25,000 रुपये की सहयोग राशि की घोषणा की। पूर्व अध्यक्ष विंध्याचल सिंह ने छात्रावासों के बंद होने को कॉलेज की पुरानी स्वस्थ परंपराओं के क्षरण का कारण बताते हुए छात्राओं को भी प्राचीन छात्र संगठन से जोड़ने की आवश्यकता बताई। समारोह की अध्यक्षता करते हुए संस्था के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि संगठन की स्थापना 1913 में तत्कालीन प्राचीन छात्रों द्वारा की गई थी। यह संस्था आज भी राजर्षि जी के मूल्यों को संजोते हुए सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय है।इस दौरान डॉ. शिवराम सिंह, धनंजय सिंह, आनंद विजय सिंह, प्रदीप सिंह, डॉ. अशोक कुमार सिंह सहित कई पूर्व छात्रों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राचीन छात्र उपस्थित रहे, जिन्होंने एक-दूसरे से मिलकर अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि कॉलेज के छात्रावासों का पुनः संचालन जरूरी है, क्योंकि यही छात्रावास संस्थान की पहचान और उसकी सांस्कृतिक परंपरा की धुरी रहे हैं। अधिवेशन सौहार्द, स्मृतियों और संगठन की एकजुटता के प्रतीकों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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