वाराणसी। भारतीय जीवन-दर्शन की सनातन योग परम्परा को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा संचालित निःशुल्क त्रैमासिक योग प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ आज सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के तत्वावधान में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा द्वारा किया गया। यह शिविर शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य के संवर्धन के साथ-साथ समाज में सकारात्मक जीवन मूल्यों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “योग केवल व्यायाम नहीं, अपितु यह भारतीय दर्शन की वह साधना है, जो ‘चित्तवृत्ति निरोध’ के माध्यम से मानव को आत्मबोध की ओर अग्रसर करती है।” उन्होंने पतञ्जलि योगसूत्रमेंप्रतिपादित“योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” के सिद्धांत को आज के अशान्त, तनावग्रस्त एवं असंतुलित जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। कुलपति ने कहा कि संस्कृत वाङ्मय में योग को जीवन की समग्र साधना के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि के माध्यम से मानव जीवन को संयमित, अनुशासित एवं सात्त्विक बनाया जाता है। “योगः कर्मसु कौशलम्” का भाव यह स्पष्ट करता है कि योग व्यक्ति को कर्मशील, संतुलित एवं कर्तव्यनिष्ठ बनाता है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ती शारीरिक व्याधियों, मानसिक तनाव, अवसाद एवं जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को समाज के समक्ष गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि ऐसे समय में योग ही वह शास्त्रोक्त साधन है, जो व्यक्ति को स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक दृष्टि प्रदान कर सकता है। योग भारतीय ज्ञान परम्परा की अमूल्य धरोहर है, जिसे अपनाकर ही “स्वस्थ व्यक्ति–सशक्त राष्ट्र” की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा संचालित यह त्रैमासिक योग प्रशिक्षण शिविर पूर्णतः निःशुल्क है। इसमें अनुभवी एवं प्रशिक्षित योगाचार्यों के निर्देशन में योगासनों, प्राणायाम, ध्यान एवं योग के दार्शनिक पक्ष का सम्यक् प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को योग के शास्त्रीय स्वरूप से परिचित कराते हुए उसे दैनिक जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी जाएगी। कुलपति ने आमजन, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं योग के प्रति रुचि रखने वाले सभी वर्गों से इस शिविर में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण शिविर न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, अपितु सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना के जागरण का भी सशक्त माध्यम सिद्ध होगा। योग प्रशिक्षक डॉ. राजकुमार मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान निरन्तर भारतीय ज्ञान विज्ञान, संस्कृत शिक्षा एवं योग परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विविध शैक्षणिक एवं प्रशिक्षणात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। यह निःशुल्क त्रैमासिक योग प्रशिक्षण शिविर उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।










