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नशामुक्त युवा, विकसित भारत की नींव: संस्कृत विश्वविद्यालय से निकली ऐतिहासिक साइकिल यात्रा

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वाराणसी, 8 अक्टूबर। नशामुक्त युवा और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में गुरुवार को भव्य साइकिल यात्रा निकाली गई। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय आह्वान के अनुरूप आयोजित ‘नशामुक्त युवा–विकसित भारत के लिए संकल्प अभियान’ के तहत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक हेरिटेज भवन से निकली इस यात्रा में सैकड़ों युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। युवाओं ने नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि “नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की आधारशिला हैं। युवा शक्ति के संकल्प से ही 2047 का भारत अपना गौरवशाली भविष्य गढ़ेगा।” उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर और मन को ही कमजोर नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र की सामूहिक शक्ति पर भी पड़ते हैं। स्वस्थ, संस्कारवान और जागरूक युवा ही देश की वास्तविक पूंजी हैं। उनकी ऊर्जा और प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देकर भारत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए युवाओं का नशे से मुक्त रहना और शिक्षा, खेल, नवाचार, सेवा तथा रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी करना आवश्यक है। नशामुक्ति केवल व्यक्तिगत जीवनशैली का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। इसके लिए शासन-प्रशासन के प्रयासों के साथ प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता जरूरी है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने मित्रों, सहपाठियों तथा समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकाय प्रमुख एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि युवा देश की रीढ़ हैं और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति उनके सामने गंभीर सामाजिक चुनौती है। जेन-जी अपनी तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता के बल पर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा को नशे से दूर रखकर शिक्षा, खेल, उद्यमिता, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाना समय की आवश्यकता है।

प्रो. मिश्र ने कहा कि यदि नई पीढ़ी नशामुक्ति को अपने जीवन का संकल्प बना ले, तो यह अभियान केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवार और समाज में व्यापक परिवर्तन का माध्यम बनेगा। युवाओं को स्वयं बदलाव का वाहक बनकर नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाना चाहिए।

राष्ट्रगान और भारत माता के जयघोष के साथ शुरू हुई यात्रा विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से निकलकर लहुराबीर, आजाद पार्क, मैदागिन चौराहा, पटेल धर्मशाला और तेलियाबाग होते हुए पुनः विश्वविद्यालय की ओर रवाना हुई। साइकिल सवार युवाओं के हाथों में ‘नशामुक्त भारत’, ‘युवा जागो, नशा भागो’ और ‘नशामुक्त भारत–स्वस्थ भारत’ जैसे संदेशों वाली तख्तियां और बैनर थे। मार्ग में युवाओं ने लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए स्वस्थ और जिम्मेदार समाज के निर्माण का संदेश दिय

कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने स्वयं नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। अभियान को डिजिटल माध्यम से भी जोड़ा गया। प्रतिभागियों ने ‘नशामुक्त युवा’ अभियान के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकरण कर डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त किए, जिससे उनकी सहभागिता राष्ट्रीय जनजागरूकता पहल से जुड़ी।

आयोजकों के अनुसार, विश्वविद्यालय से निकली साइकिल यात्रा 100 सप्ताह तक चलने वाले व्यापक राष्ट्रव्यापी संकल्प अभियान की शुरुआत है। इसके तहत खेलकूद प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और अन्य जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने तथा अपनी ऊर्जा रचनात्मक और राष्ट्रहितकारी कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

कार्यक्रम में कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. राजनाथ, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. विजेन्द्र कुमार, डॉ. नितिन कुमार और डॉ. दुर्गेश पाठक सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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