वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत समारोह की पूर्ववर्ती गतिविधियों के अंतर्गत सोमवार को योगसाधना केन्द्र में एक घंटे का ‘पुस्तक पठन दीक्षोत्सव’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में पुस्तक पठन की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा अध्ययन के प्रति गंभीर और चिंतनशील दृष्टिकोण विकसित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विद्या कुमारी चन्द्रा ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान, संस्कार, व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों की सबसे सशक्त आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी पुस्तक पठन की परम्परा को जीवंत बनाए रखना हमारी बौद्धिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है तथा विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन की आदत विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मोबाइल और लैपटॉप की तुलना में पुस्तकों से अध्ययन करने पर मन अधिक एकाग्र रहता है, विषय की बेहतर समझ विकसित होती है तथा उच्चारण और अभिव्यक्ति कौशल में भी वृद्धि होती है। उन्होंने ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण में पुस्तकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। संचालन अर्थशास्त्र विभाग की अध्यापिका डॉ. आराधना ने किया। इस अवसर पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव, श्री आदित्य कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।










