वाराणसी। उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, वाराणसी द्वारा आयोजित खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी–2025 अर्बन हाट प्रांगण, चौकाघाट में 20 से 29 दिसंबर तक जनआकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वदेशी की पहचान खादी आज फैशन और उपयोगिता का पर्याय बन चुकी है। हाथ कते सूत—कपास, रेशम और ऊन—से भारत के हथकरघों पर बुने वस्त्र न केवल मौसम के अनुकूल होते हैं, बल्कि रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी यू.पी. सिंह ने बताया कि 24 दिसंबर तक प्रदर्शनी में ₹91 लाख की बिक्री दर्ज की गई है, जो खादी एवं ग्रामोद्योग परिवार के लिए उत्साहवर्धक संकेत है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य आमजन को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। प्रदर्शनी में वाराणसी सहित उत्तराखंड, प्रतापगढ़, मीरजापुर, कुशीनगर, प्रयागराज आदि जनपदों की पंजीकृत इकाइयों के 125 स्टॉल लगाए गए हैं—जिनमें 22 खादी और 103 ग्रामोद्योग के स्टॉल शामिल हैं। यहां कॉलेज विद्यार्थियों से लेकर कार्यालय जाने वाले पुरुष-महिलाओं तक, हर आयु वर्ग के लिए आकर्षक उत्पाद उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि प्रतिदिन सायंकाल माँ मुंडेश्वरी म्यूजिक, वाराणसी द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इस तरह प्रदर्शनी खरीदारी के साथ-साथ परिवार संग संगीत और संस्कृति का आनंद लेने का सुनहरा अवसर भी प्रदान कर रही है।









