नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी की अहम बैठक से नदारद रहे। पार्टी की रणनीति तय करने के लिए बुलाए गए शीतकालीन सत्र की महत्वपूर्ण बैठक में उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या थरूर वास्तव में कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं। पार्टी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया गया कि थरूर अपनी मां की देखभाल में व्यस्त होने के कारण बैठक में शिरकत नहीं कर सके। हालांकि यह लगातार दूसरी बार है जब वह किसी प्रमुख बैठक में दिखाई नहीं दिए, जिसके बाद अटकलें और तेज हो गई हैं। हाल ही में थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी विदेश नीति की तारीफ किए जाने से कांग्रेस के कई नेताओं में नाराजगी देखी गई थी। पार्टी ने स्पष्ट किया था कि यह थरूर के निजी विचार हैं, कांग्रेस की आधिकारिक राय नहीं। इसके अलावा, थरूर ने एक कार्यक्रम में बयान दिया था कि कांग्रेस पहले की तुलना में “अधिक वामपंथी” हो गई है, जो उनके विचारों से मेल नहीं खाता। इसे भी पार्टी नेतृत्व के प्रति उनकी बढ़ती असहजता के संकेत के रूप में देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच यह दूरी बढ़ती है, तो इसका प्रभाव विशेषकर केरल की राजनीति पर पड़ सकता है, जहां थरूर की पकड़ और लोकप्रियता काफी मजबूत मानी जाती है। हालांकि इन सबके बीच थरूर भाजपा में जाने की अटकलों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वह किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने का इरादा नहीं रखते। इसके बावजूद पार्टी और थरूर के बीच बढ़ती खामोशी कांग्रेस के अंदर संवादहीनता और असहमति को उजागर करती है। अब राजनीतिक गलियारों में निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में थरूर का अगला कदम क्या होगा—क्या वह कांग्रेस में बने रहकर ही अपनी राह तलाशेंगे या किसी नए विकल्प की ओर रुख करेंगे।









