Follow us on

Home » राज्य समाचार » उत्तर प्रदेश » कथा में बैठना बड़ी बात नहीं, कथा को जीवन में उतारना ही असली उद्देश्य : आचार्य सच्चिदानन्द जी महाराज

कथा में बैठना बड़ी बात नहीं, कथा को जीवन में उतारना ही असली उद्देश्य : आचार्य सच्चिदानन्द जी महाराज

Share this post:

मीरजापुर। क्षेत्र के महोखर ग्राम में आयोजित सप्ताह श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य सच्चिदानन्द जी महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, सत्संग और गुरु की महिमा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कथा में बैठना बड़ी बात नहीं है, बल्कि आपके अंदर कथा कितनी बैठी है, यह महत्वपूर्ण है। महापुरुषों का संग जीवन में बड़े ही दुर्लभ संयोग से प्राप्त होता है।

महाराज जी ने कहा कि जीवन में अमंगल न हो, इसी उद्देश्य से मंगलाचरण किया जाता है। ‘सत्यं परं धीमहि’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण भी वही कर सकता है, जिस पर भगवान की कृपा होती है। जब तक जीव गुरु के चरणों में शरणागत नहीं होता, तब तक उसका वास्तविक कल्याण संभव नहीं है।

कथा के दौरान उन्होंने महाभारत युद्ध के बाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि युद्धभूमि में घायल अवस्था में पड़े दुर्योधन से मिलने पहुंचे गुरु पुत्र अश्वत्थामा ने उसके कहने पर पांडवों के शीश लाने का वचन दिया। लेकिन अश्वत्थामा ने पांडवों के स्थान पर उनके सोते हुए पुत्रों का वध कर उनके शीश दुर्योधन के सामने रख दिए। यह देखकर दुर्योधन को गहरा दुख हुआ।

इस घटना की जानकारी मिलने पर अर्जुन ने अश्वत्थामा को दंड देने का प्रण लिया। हालांकि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर उसे प्राणदंड देने के बजाय अपमानित कर छोड़ दिया गया। इसके बाद क्रोधित अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को नष्ट करने के लिए ब्रह्मास्त्र चला दिया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कृपा से गर्भस्थ शिशु की रक्षा की। यही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित के रूप में प्रसिद्ध हुए।

कथा के दौरान राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं।

लेखक के बारे में

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

मौसम अपडेट

राशिफल