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अतिक्रमण कार्रवाई के खिलाफ दशाश्वमेध के वेंडर लामबंद, उत्पीड़न व मुकदमों पर जताया कड़ा विरोध

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वाराणसी। दशाश्वमेध क्षेत्र के स्ट्रीट वेंडरों ने कथित पुलिस एवं नगर निगम कार्रवाई के विरोध में एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा की मांग तेज कर दी है। स्ट्रीट वेंडर सेवा समिति एवं दशाश्वमेध पटरी व्यवसायी संघ (विरासत बाजार) के तत्वावधान में आयोजित विशेष बैठक में वेंडरों ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर हो रहे उत्पीड़न और संघ पदाधिकारियों पर दर्ज मुकदमों को लेकर गंभीर चिंता जताई।

दशाश्वमेध स्थित एक सभागार में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में वेंडरों ने भाग लिया और प्रशासनिक कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए विरोध दर्ज कराया। बैठक को संबोधित करते हुए स्ट्रीट वेंडर सेवा समिति के अध्यक्ष ऋषि नारायण ने आरोप लगाया कि पुलिस और नगर निगम द्वारा लगातार वेंडरों को हटाया जा रहा है, जिससे उनके समक्ष रोज़गार का संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू “स्ट्रीट वेंडर (आजीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम-2014” तथा राज्य सरकार के 2017 के नियमों के तहत वेंडरों को स्पष्ट सुरक्षा प्राप्त है, बावजूद इसके उन्हें बार-बार बेदखल किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार सर्वेक्षण और प्रमाण-पत्र जारी होने तक किसी भी वेंडर को हटाया नहीं जा सकता, लेकिन जमीनी स्तर पर इन प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। वर्षों पुराने बाजारों को “विरासत बाजार” घोषित करने की मांग भी लंबे समय से लंबित है, जिससे पारंपरिक व्यवसायियों की स्थिति और अस्थिर हो गई है।

दशाश्वमेध पटरी व्यवसायी संघ के अध्यक्ष अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट के बीच फुटपाथ पर वर्षों से व्यवसाय कर रहे वेंडरों को चिन्हित वेंडिंग जोन के बावजूद बार-बार हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके सहित कई वेंडरों पर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिससे भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

वेंडरों ने यह भी मुद्दा उठाया कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लिए गए ऋण की अदायगी में उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बार-बार दुकान हटाए जाने से उनकी आय प्रभावित हो रही है। इस कारण सैकड़ों परिवार आर्थिक संकट और भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि वेंडिंग जोन विकसित करने के बजाय कई स्थानों पर पार्किंग और अन्य व्यवस्थाएं विकसित कर दी गई हैं, जिससे वेंडरों का विस्थापन बढ़ा है। इस संबंध में आईजीआरएस के माध्यम से कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।

अंत में समिति ने प्रशासन से मांग की कि स्ट्रीट वेंडर अधिनियम-2014 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, वेंडरों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें स्थायी वेंडिंग जोन उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में संरक्षक लक्ष्मण केसरी, सचिव धर्मराज गुप्ता, मीडिया प्रभारी संजय सिंह, श्वेत गुप्ता, दीपक सोनकर, ओमप्रकाश भारद्वाज, मनोज जायसवाल (अधिवक्ता), सूरज सोनकर, मुन्नी देवी, अर्चना चंदवानी सहित सैकड़ों स्ट्रीट वेंडर उपस्थित रहे।

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