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SIR जांच का अनोखा खुलासा: दिल्ली का ‘सलीम’ दरअसल बरेली का बिछड़ा ओम प्रकाश निकला, 25 साल बाद परिवार से हुआ मिलन

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दिल्ली/बरेली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान सामने आई एक असामान्य पहचान-पुष्टि ने न सिर्फ प्रशासन को हैरान कर दिया बल्कि बरेली जिले के एक परिवार को 25 वर्ष बाद अपने खोए हुए सदस्य से मिलवा दिया। दिल्ली के मतदाता सूची में “सलीम पुत्र ताहिर हुसैन” के नाम से दर्ज व्यक्ति वास्तव में बरेली जिले का निवासी ओम प्रकाश पुत्र वेदराम निकला, जो वर्षो पहले घर छोड़कर कहीं लुप्त हो गया था। परिवारजनों के अनुसार, ओम प्रकाश ने लगभग 25 वर्ष पूर्व घरेलू विवाद के चलते अचानक घर छोड़ दिया। इसके बाद उसका कोई पता-ठिकाना नहीं मिला और परिजन धीरे-धीरे उसकी खोज छोड़ने को मजबूर हो गए। इसी दौरान दिल्ली पहुंचकर उसने ‘सलीम’ नाम से नया जीवन शुरू किया, विवाह किया और पांच बच्चों का पिता भी बन गया। दिल्ली में उसके दस्तावेज़, पहचान पत्र व मतदाता सूची में पिता का नाम ताहिर हुसैन दर्ज था, जिससे उसकी नई पहचान पूरी तरह स्थापित हो चुकी थी। राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची में सुधार और सत्यापन के लिए चल रहे SIR अभियान के दौरान बीएलओ को उसके दस्तावेज़ों में विसंगति नजर आई। दस्तावेज़ों के बैक-ट्रैक और स्थायी निवास से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि दिल्ली में दर्ज व्यक्ति का मूल निवासी बरेली से मेल खाता है। जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की गई तो उसने भी स्वीकार किया कि वह मूल रूप से बरेली का ओम प्रकाश है और किशोरावस्था में घर छोड़कर दिल्ली आया था। जब SIR टीम ने इसकी सूचना बरेली स्थित परिवार को दी तो परिवार हतप्रभ रह गया। वर्षों से बेटे की खोज में निराश हो चुके माता-पिता और बहन को जैसे आशा की किरण मिल गई। सूचना मिलने पर ओम प्रकाश अपनी बहन चंद्रकली और बेटे जुम्मन के साथ काशीपुर गांव पहुंचा। गांव में उसके पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों ने उसका स्वागत किया। कई लोगों के लिए यह दृश्य भावुक कर देने वाला रहा। प्रशासन ने दिल्ली में दर्ज मतदाता पहचान पत्र और संबंधित कागजात में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारी अब उसकी पहचान को उसके मूल दस्तावेज़ों—ओम प्रकाश पुत्र वेदराम—के आधार पर अपडेट कर रहे हैं।परिजनों ने कहा—SIR अभियान न होता, तो मिलन शायद कभी न हो पातापरिवारजनों ने SIR टीम और स्थानीय प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर यह व्यापक सत्यापन अभियान न चल रहा होता, तो शायद वे अपने बेटे को जीवनभर खोजते ही रह जाते।

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