वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महाराजा (डॉ.) विभूति नारायण सिंह गंगापुर परिसर में सोमवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर का उत्साहपूर्ण उद्घाटन किया गया। शिविर के प्रथम दिन नारी सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण जनजागरण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के अंतर्गत नारी सशक्तिकरण विषय पर विशेष विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने महिलाओं की शिक्षा, उनके अधिकारों तथा समाज के समग्र विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की भागीदारी और उनके सशक्तिकरण पर निर्भर करती है।
इस अवसर पर एनएसएस के स्वयंसेवकों ने परिसर से जागरूकता रैली निकालकर आसपास के क्षेत्रों में लोगों को विभिन्न सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया। रैली के माध्यम से स्वच्छता, शिक्षा, महिला सम्मान तथा सामाजिक समरसता के संदेश दिए गए।

इसके उपरांत स्वयंसेवकों की टीम ने ग्राम सुइचक पहुंचकर ग्रामीणों के बीच स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से संबंधित जनजागरण अभियान चलाया। इस दौरान ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई तथा उन्हें सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया।
शिविर के अंतर्गत अपराह्न 3 बजे से बौद्धिक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में गंगापुर परिसर के कुलानुशासक डॉ. अविनाश सिंह उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण किसी भी समाज के समग्र विकास की आधारशिला है। जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक होती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों का संतुलित विकास संभव होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वावलंबन और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों को समाज सेवा, अनुशासन और जनजागरण की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में परिसर प्रभारी डॉ. मनीष कुमार सिंह ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं के सम्मान, समान अधिकार और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनकर महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उनके अनुसार नारी शक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे सशक्त बनाकर ही एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों, शिक्षकों तथा स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही। पूरे वातावरण में सेवा, जागरूकता और सामाजिक सरोकारों की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली।









