महराजगंज। जिले के सदर विकास क्षेत्र के अगया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथावाचक अजय शंकर तिवारी (महाराज) ने कहा कि “जो अंधकार से प्रकाश के मार्ग पर ले जाए, वही सच्चा गुरु होता है।” उन्होंने कहा कि गुरु ही मनुष्य के जीवन में ज्ञान का दीप प्रज्वलित कर उसे मोह-माया से मुक्त होने की दिशा दिखाता है।
कथा के दौरान महाराज ने सृष्टि रचना का विस्तार से वर्णन करते हुए विदुर-मैत्रेय संवाद का मार्मिक प्रसंग श्रोताओं को सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु की नाभि से प्रकट हुए ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की और उसी से चराचर जगत का विस्तार हुआ।
कपिल भगवान द्वारा माता देवहूति को दिए गए भक्ति और वैराग्य के उपदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति ही मनुष्य को परमात्मा तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि सौतेली माता के अपमान से व्यथित बालक ध्रुव मात्र पांच वर्ष की आयु में वन को प्रस्थान कर गए और कठोर तपस्या के माध्यम से भगवान की आराधना की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें ध्रुव लोक में अटल स्थान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, उसकी पुकार अवश्य सुनी जाती है।
कथा में विदुर जी द्वारा धृतराष्ट्र को पांडवों का राज्य लौटाने की सलाह देने का प्रसंग भी सुनाया गया। महाराज ने बताया कि दुर्योधन द्वारा अपमानित किए जाने के बाद विदुर जी हस्तिनापुर त्यागकर तीर्थाटन के लिए निकल पड़े, जो त्याग और धर्मनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तगण भाव-विभोर होकर भक्ति रस में सराबोर होते रहे। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।









