वाराणसी। पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा अपराध नियंत्रण एवं गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत थाना चितईपुर पुलिस ने तत्परता, संवेदनशीलता और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक मानसिक रूप से अस्वस्थ गुमशुदा नाबालिग बालिका को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सुपुर्द किया। पुलिस की इस सराहनीय कार्रवाई से न केवल एक परिवार को राहत मिली, बल्कि आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना भी सुदृढ़ हुई है।
प्राप्त विवरण के अनुसार दिनांक 20 फरवरी 2026 को थाना चितईपुर क्षेत्र अंतर्गत चितईपुर तिराहे पर एक लगभग 13 वर्षीय नाबालिग बालिका भटकती हुई देखी गई। राहगीरों द्वारा उसकी स्थिति संदिग्ध एवं असहाय प्रतीत होने पर स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही थाना चितईपुर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और बालिका को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बालिका मानसिक रूप से अस्वस्थ है और वह अपने निवास स्थान से बिछड़ गई है। वह अपने पिता के नाम के अतिरिक्त कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रही थी, जिससे उसकी पहचान स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो गया।
पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देशन में तथा पुलिस उपायुक्त जोन काशी एवं अपर पुलिस उपायुक्त जोन काशी के पर्यवेक्षण में सहायक पुलिस आयुक्त भेलूपुर व प्रभारी निरीक्षक थाना चितईपुर के कुशल नेतृत्व में पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की। बालिका की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे थाने लाया गया और महिला पुलिसकर्मियों की निगरानी में रखा गया। साथ ही उसके हाव-भाव, पहनावे और उपलब्ध सीमित जानकारी के आधार पर पहचान स्थापित करने का प्रयास शुरू किया गया।

चूंकि बालिका अपने घर का पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी, इसलिए पुलिस टीम ने तकनीकी संसाधनों का सहारा लिया। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिससे यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि वह किस दिशा से आई है और उसके साथ कोई व्यक्ति तो नहीं था। फुटेज के विश्लेषण से कुछ सुराग प्राप्त हुए, जिनके आधार पर आसपास के क्षेत्रों में संपर्क स्थापित किया गया। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की गई और संभावित क्षेत्रों में सूचना प्रसारित की गई।
अथक प्रयासों के उपरांत पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली। प्राप्त संकेतों के आधार पर एक ऐसे परिवार से संपर्क स्थापित हुआ, जिसकी 13 वर्षीय पुत्री घर से लापता थी और मानसिक रूप से अस्वस्थ बताई जा रही थी। पुलिस ने परिजनों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर बालिका की पहचान की पुष्टि की और उन्हें तत्काल थाना चितईपुर बुलाया। जब परिजन थाने पहुंचे और बालिका को सुरक्षित पाया, तो उनकी आंखों में राहत और खुशी स्पष्ट झलक रही थी।
आवश्यक औपचारिकताओं एवं पहचान की पुष्टि के उपरांत नाबालिग बालिका को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। अपनी पुत्री को सुरक्षित पाकर परिजन भावुक हो उठे और थाना चितईपुर पुलिस की तत्परता एवं संवेदनशीलता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय पर सक्रिय न होती तो किसी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता था।
पुलिस की इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक श्री राकेश कुमार गौतम के नेतृत्व में उपनिरीक्षक श्री राम स्वरूप सिंह, हेड कांस्टेबल सतीशचन्द्र यादव, हेड कांस्टेबल चन्द्रपाल एवं महिला हेड कांस्टेबल सीमा सरोज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने संयम, धैर्य और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए न केवल बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उसके परिजनों को शीघ्रता से खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।
उल्लेखनीय है कि पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत पुलिस टीमें नियमित रूप से निगरानी, सूचना संकलन एवं तकनीकी साधनों का उपयोग कर रही हैं। इस अभियान का उद्देश्य गुमशुदा बच्चों, महिलाओं एवं अन्य व्यक्तियों को शीघ्रता से खोजकर उनके परिजनों से मिलाना और संभावित अपराधों की रोकथाम करना है। थाना चितईपुर पुलिस की यह सफलता उसी अभियान का सशक्त उदाहरण है।
मानसिक रूप से अस्वस्थ या नाबालिग बच्चों के मामले विशेष संवेदनशील होते हैं, क्योंकि वे स्वयं अपनी सुरक्षा या पहचान के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने में सक्षम नहीं होते। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह एक अभिभावक की भूमिका निभाती है। इस घटना में भी पुलिस ने उसी भावना से कार्य करते हुए बालिका को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया और हर संभव प्रयास कर उसे उसके परिवार से मिलाया।
सामाजिक दृष्टि से भी यह घटना महत्वपूर्ण है। महानगरों में बढ़ती भीड़ और व्यस्तता के बीच यदि कोई नाबालिग या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति भटक जाए, तो उसके लिए परिस्थितियां अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभावित दुर्घटनाओं और अपराधों को रोकने में निर्णायक साबित होता है। चितईपुर पुलिस की यह कार्रवाई इसी सतर्कता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि पुलिस की सक्रियता से आमजन में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ होती है और यह संदेश जाता है कि संकट की घड़ी में पुलिस तत्परता से साथ खड़ी है। परिजनों द्वारा व्यक्त आभार ने भी पुलिस टीम का मनोबल बढ़ाया है।
समग्र रूप से देखा जाए तो थाना चितईपुर पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक गुमशुदा बालिका की बरामदगी भर नहीं है, बल्कि यह संवेदनशील पुलिसिंग, तकनीकी दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है। पुलिस की सजगता और त्वरित पहल से एक परिवार को अपनी खोई हुई मुस्कान वापस मिली। ऐसी घटनाएं समाज और पुलिस के बीच विश्वास के सेतु को और अधिक मजबूत करती हैं तथा यह संदेश देती हैं कि सुरक्षा और सेवा का दायित्व निभाने में पुलिस सदैव प्रतिबद्ध है।









