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विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी का सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में गरिमामय स्वागत

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वाराणसी, 17 फरवरी 2026।विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी का सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में आगमन अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने वैदिक मंगलाचरण, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न अर्पित कर भारतीय परम्परा के अनुरूप उनका आत्मीय स्वागत किया। अपने प्रवास के दौरान बड़े दिनेश जी ने परिसर स्थित ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय का विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने वहाँ संरक्षित दुर्लभ एवं बहुमूल्य पाण्डुलिपियों को भारतीय ज्ञान-परम्परा की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक चेतना और शास्त्रीय परम्पराओं का सशक्त केंद्र है। उन्होंने वेद, दर्शन, आयुर्वेद, व्याकरण एवं काव्यशास्त्र से संबंधित पाण्डुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण एवं डिजिटलीकरण को राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण कार्य बताया। पाण्डुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण एवं आधुनिक तकनीक के प्रयोग की सराहना करते हुए उन्होंने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ‘ज्ञान भारतम्’ योजना का उल्लेख किया और विश्वविद्यालय की दुर्लभ पाण्डुलिपियों के व्यापक डिजिटलीकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि हमारी प्राचीन धरोहरें डिजिटल माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचेंगी, तो भारतीय ज्ञान-परम्परा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी। विश्वविद्यालय के अभ्युदय, संरक्षण एवं विकास के लिए उन्होंने सदैव संकल्पित भाव से प्रतिबद्ध रहने की बात भी कही, इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय विद्याओं एवं आध्यात्मिक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर समर्पित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है। बड़े दिनेश जी का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं शोधात्मक विकास के लिए अत्यंत प्रेरणादायी सिद्ध होगा और उनके संरक्षण से संस्थान को नई दिशा एवं ऊर्जा प्राप्त होगी। परिसर भ्रमण के उपरांत विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान योजनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में भारतीय ज्ञान-प्रणाली के एकीकरण तथा समाजोपयोगी अध्ययनों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। संस्कृत शिक्षा के आधुनिकीकरण, तकनीक एवं परम्परा के समन्वय तथा युवाओं में सांस्कृतिक चेतना के विकास पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस अवसर पर प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. राजनाथ सहित अनेक वरिष्ठ आचार्यगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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