वाराणसी। शिक्षा, समावेशन और शांति की संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय शिक्षाविद् एवं इंटरनेशनल रियल मीडिया फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष देशराज विक्रांत (एलएलएम), सिवान, बिहार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानद डॉक्टरेट (ऑनरेरी डॉक्टरेट इन एजुकेशन) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ द आर्ट्स, लिटरेचर,एजुकेशन, पीस एंड कल्चर(FEMALPC) तथा यूनिवर्सल डॉक्टोरल कॉलेजिएट काउंसिल ऑफ एक्सीलेंस (CUDOCI) के संयुक्त तत्वावधान में गणराज्य पेरू में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।
संस्था द्वारा यह मानद उपाधि “समावेशन और शांति की संस्कृति” के क्षेत्र में प्रदान की गई है, जो मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, विविधता के सम्मान तथा वैश्विक भाईचारे को सशक्त बनाने के लिए किए गए उनके कार्यों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक है।
प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया गया है कि देशराज विक्रांत ने शिक्षा, कला, साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रों के बीच शांति, समानता और संवाद के सशक्त सेतु के रूप में स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयास किए हैं। उनके कार्यों ने न केवल शैक्षिक दृष्टि से सकारात्मक प्रभाव डाला है, बल्कि समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में भी ठोस योगदान दिया है।

एफईएमएएलपीसी द्वारा मान्यता प्राप्त यह मानद डॉक्टरेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत है, जो उनके कार्यों की विश्वसनीयता, प्रभावशीलता और वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है। समारोह के दौरान उपस्थित अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों एवं संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि देशराज विक्रांत का कार्य शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है और यह वैश्विक स्तर पर स्थायी शांति एवं मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करता है।
यह सम्मान न केवल देशराज विक्रांत की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत के लिए भी गौरव का विषय है, जो यह प्रमाणित करता है कि भारतीय शिक्षाविद् वैश्विक मंच पर मानव मूल्यों, समावेशन और शांति निर्माण में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।









