वाराणसी, 25 जनवरी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस का आयोजन रविवार को अत्यंत गरिमामय और प्रेरक वातावरण में संपन्न हुआ। अपराह्न 1:00 बजे विश्वविद्यालय के योगसाधना केन्द्र में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवाओं को मताधिकार के प्रति जागरूक करना तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “मेरा भारत, मेरा वोट (भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक)” रही। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी राकेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मतदान का अधिकार हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की सजगता और सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है। प्रत्येक मतदाता का एक-एक वोट देश की दिशा और दशा तय करता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे बिना किसी दबाव के, विवेकपूर्ण ढंग से अपने मताधिकार का प्रयोग करें और लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं मुख्य अनुशासनाधिकारी प्रो. जितेन्द्र कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस विशेष रूप से युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि वोट देना केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है, जिसे सोच-समझकर निभाना चाहिए ताकि देश का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बन सके। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक विज्ञान विभाग एवं छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने किया। उन्होंने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जागरूक मतदान ही मजबूत लोकतंत्र की नींव है और प्रत्येक नागरिक को अपने नागरिक कर्तव्य के प्रति सजग रहना चाहिए। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र कुमार एवं कुलसचिव राकेश कुमार द्वारा उपस्थित अध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्रों को निष्पक्ष, निर्भीक एवं सक्रिय चुनाव सहभागिता की शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के दौरान सभागार लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के भाव से ओतप्रोत दिखाई दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. शंभू नाथ शुक्ल, प्रो. महेन्द्र पांडेय, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. रविशंकर पांडेय, श्री सुनील कुमार चौधरी सहित विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में अध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।









