वाराणसी। मणिकर्णिका घाट स्थित प्राचीन मंदिर के ध्वस्तीकरण के बाद उसकी मूर्तियों एवं अवशेषों को गुरुधाम स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) परिसर में सुरक्षित रखे जाने के शासन-प्रशासन के दावे की वास्तविकता जानने जा रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
गिरफ्तार किए गए नेताओं में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे, प्रदेश प्रवक्ता संजीव सिंह, सतनाम सिंह, महानगर अध्यक्ष युवा कांग्रेस चंचल शर्मा, प्रमोद वर्मा, धीरज सोनकर, संतोष चौरसिया, अफसर खान, नरसिंह वर्मा, खालिद सिद्दीकी और इमाम राजा शामिल हैं।
गिरफ्तारी के दौरान महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता किसी प्रकार का प्रदर्शन या अव्यवस्था फैलाने नहीं जा रहे थे, बल्कि केवल शासन-प्रशासन, मंत्री और विधायक द्वारा किए गए दावों की सच्चाई जानने तथा मंदिर की मूर्तियों एवं अवशेषों का शांतिपूर्ण अवलोकन-दर्शन करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन को पूर्व सूचना दी गई थी और जिलाधिकारी से विधिवत अनुमति भी मांगी गई थी, जिसकी रिसीविंग कांग्रेस के पास मौजूद है।

राघवेन्द्र चौबे ने आरोप लगाया कि न तो प्रशासन ने अनुमति दी और न ही किसी प्रकार का संवाद किया गया, बल्कि सीधे शांतिपूर्ण ढंग से जा रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मूर्तियां वास्तव में सुरक्षित हैं, तो फिर उन्हें देखने से कांग्रेस नेताओं को क्यों रोका जा रहा है। इससे यह संदेह गहराता है कि सरकार कुछ छिपाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि काशी की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। चौबे ने यह भी कहा कि मोदी–योगी सरकार दमन और गिरफ्तारी के जरिए सवालों को दबा सकती है, लेकिन सच्चाई को नहीं। यह लड़ाई सत्य और आस्था की है, जो आगे भी जारी रहेगी।
घटना के बाद मणिकर्णिका घाट और एएसआई परिसर से जुड़े पूरे प्रकरण पर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है, जबकि प्रशासन की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।









