भारतीय वायुसेना (IAF) को आने वाले समय में एक अहम समर्थन मिलने जा रहा है। ओमान सरकार भारत को अपने बेड़े में मौजूद 20 से अधिक जगुआर फाइटर जेट सौंपने को तैयार है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की संख्या लगातार कम होती जा रही है और पुराने जगुआर विमानों को operative बनाए रखने के लिए स्पेयर पार्ट्स की कमी महसूस की जा रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ओमान द्वारा दिए जाने वाले ये जगुआर मुख्य रूप से स्पेयर पार्ट्स, मेनटेनेंस सपोर्ट और अपग्रेड जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत के पास जगुआर 1979 से सेवा में हैं और यह फाइटर जेट कम ऊंचाई पर सटीक स्ट्राइक करने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। हालांकि समय के साथ इनकी सर्विसेबिलिटी चुनौतीपूर्ण होती जा रही थी। भारतीय रक्षा अधिकारियों ने इसे “बहुत जरूरी और समयानुकूल मदद” बताया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान से मिलने वाले जगुआरों के कारण न केवल मौजूदा बेड़े की उम्र बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि भारतीय वायुसेना अपनी स्ट्राइक क्षमताओं को भी बनाए रख पाएगी।फिलहाल जगुआर अपग्रेड प्रोग्राम (DARIN-III) जारी है, जिसके तहत इनके एवियोनिक्स और हथियार सिस्टम को आधुनिक बनाया जा रहा है। ओमान से प्राप्त होने वाले विमान और पार्ट्स इस अपग्रेड प्रक्रिया को भी गति देंगे।रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, जब तक राफेल और भविष्य के AMCA जैसे नए फाइटर बड़े पैमाने पर स्क्वाड्रन में शामिल नहीं हो जाते, तब तक जगुआर जैसे पुराने लेकिन भरोसेमंद फाइटर जेट IAF के लिए बेहद उपयोगी बने रहेंगे।









