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शिवाजी जयंती पर काशी से ‘गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ का आरंभ

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वाराणसी, 6 मार्च। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को काशी के शंकराचार्य घाट पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर ‘गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ काविधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीअविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत शंकराचार्य महाराज द्वारा विधि-विधान से गंगा पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर तिलक कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को गौ-रक्षा का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे और उन्हें इतिहास में गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। उन्होंने शास्त्रीय आधार पर कहा कि सनातन धर्म के ग्रंथों में राजा का कर्तव्य गौ, ब्राह्मण और देवायतनों की रक्षा करना बताया गया है।

शंकराचार्य महाराज ने अपने संबोधन में बताया कि इतिहास में शिवाजी महाराज ने अल्पायु में ही गौमाता की रक्षा के लिए संघर्ष का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि भगवान राम, भगवान कृष्ण, आदि शंकराचार्य, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी जैसे महापुरुषों ने धर्म, गौ और राष्ट्र की रक्षा का जो मार्ग दिखाया, उसी पर चलना आज भी प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है। उन्होंने शिवाजी के पुत्र संभाजी महाराज द्वारा रचित ग्रंथ ‘बुधभूषणम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जो क्षत्रिय गाय, ब्राह्मण और मंदिरों की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करता है, वह स्वर्ग का अधिकारी होता है और उसकी कीर्ति युगों तक बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक हिंदू को यह संकल्प लेना चाहिए कि गौ, ब्राह्मण और मंदिरों की रक्षा के लिए हर स्तर पर सजग रहना होगा। इसी उद्देश्य से ‘गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ का आरंभ किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान सिद्ध कलाकारों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिसमें उनके द्वारा गौ-रक्षा के लिए किए गए संघर्ष के प्रसंगों को प्रभावी ढंग से मंचित किया गया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय सारस्वत परिषद के तत्वावधान में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गौ-रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए ‘करपात्र गौभक्त सम्मान’ से सम्मानित किया गया। परिषद की ओर से यह सम्मान गिरीश चंद्र तिवारी एवं प्रो. विवेकानंद तिवारी ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।

शंकराचार्य महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने जानकारी दी कि शनिवार प्रातः 8:30 बजे पूज्यपाद शंकराचार्य महाराज काशी स्थित श्रीविद्यामठ से लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। यात्रा के दौरान वे सर्वप्रथम चिंतामणि गणेश मंदिर में पूजन-अर्चन करेंगे, इसके बाद संकट मोचन मंदिर पहुंचकर सामूहिक हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंगबाण का पाठ करेंगे तथा गोरक्षक हनुमान जी के समक्ष इस अभियान की सफलता के लिए प्रार्थना करेंगे।

इसके उपरांत काशी के विभिन्न स्थानों पर गौभक्तों, सनातनी समाज और अधिवक्ताओं द्वारा पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया जाएगा। निर्धारित मार्गों से होते हुए यह यात्रा 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी, जहां ‘गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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