वाराणसी। भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती (25 दिसंबर) को देशभर में ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसी क्रम में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, महाराजा (डॉ०) विभूति नारायण सिंह परिसर, गंगापुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में विविध कार्यक्रमों का आयोजन कर अटल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ० मनीष कुमार सिंह (परिसर प्रभारी) द्वारा अटल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने मौन रखकर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया। अटल जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि और दूरदर्शी राष्ट्रनायक भी थे। इस अवसर पर छात्रों एवं अतिथियों द्वारा उनकी प्रसिद्ध कविताओं—“हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा” तथा “गीत नया गाता हूँ”—का सस्वर पाठ किया गया, जिसने वातावरण को प्रेरणादायी बना दिया। वक्ताओं ने अटल जी के कार्यकाल के ऐतिहासिक निर्णयों—पोखरण परमाणु परीक्षण, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और दिल्ली-लाहौर बस सेवा—का उल्लेख करते हुए उन्हें भारत के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया। इस अवसर पर ‘पारदर्शिता और सुशासन’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें वक्ताओं ने रेखांकित किया कि अटल जी ने भारतीय राजनीति में नैतिकता, मर्यादा और मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा, “अटल जी का जीवन ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का जीवंत उदाहरण है। वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में निर्णय लेते थे। उनके विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं।” कार्यक्रम के साथ ही पूर्व काशीनरेश महाराजा (डॉ०) विभूति नारायण सिंह जी के परिनिर्वाण दिवस पर भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आयोजन को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारियों डॉ० राम प्रकाश सिंह यादव, डॉ० राजेश कुमार, डॉ० महेश कुमार सहित अन्य शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, तत्पश्चात उपस्थितजनों में प्रसाद वितरण किया गया।









