नई दिल्ली। 24 नवंबर 2025 को, भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जाएगा। जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में होने जा रहा है, जहां पहली बार सात विभिन्न देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बनेंगे। इस समारोह ने न केवल एक औपचारिक शपथ ग्रहण का स्वरूप ग्रहण किया है, बल्कि यह भारत की न्यायपालिका की वैश्विक प्रतिष्ठा और न्यायिक सहयोग की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक भी है।जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत के सामने लंबित मामलों का बड़ा बोझ है। उनका प्राथमिक लक्ष्य देश भर की अदालतों में लगभग पांच करोड़ से अधिक मामलों का निपटारा करना और मध्यस्थता को बढ़ावा देना बताया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 के समापन, पेगासस स्पाइवेयर मामले और बिहार की वोटर लिस्ट जैसे संवेदनशील मामलों में अहम भूमिका निभाई है। उनकी कानूनी यात्रा हिसार के एक छोटे से गांव से शुरू होकर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंची है, जो उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता का परिचायक है।शपथ ग्रहण समारोह में शामिल मुख्य न्यायाधीश:भूटान के प्रमुख न्यायाधीश ल्योंपो नॉर्बू शेरिंगकेन्या के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मार्था कूमे और जस्टिस सुसान नजोकीश्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश पी पद्मन सुरेसन और अन्य प्रमुख न्यायाधीशइस समारोह में इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक भागीदारी पहले कभी नहीं देखी गई, जो भारत की न्यायपालिका की बढ़ती वैश्विक छवि को दर्शाता है। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीनों का होगा, जो फरवरी 2027 तक चलेगा। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट न्यायपालिका को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की उम्मीद जताई जा रही है।यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक कानूनी कार्यक्रम है, बल्कि न्यायपालिका के वैश्विक सहयोग और लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। देशवासियों की नजरें आज जस्टिस सूर्यकांत के इस नए सफर पर हैं, जो न्याय की नई मिसाल कायम करेगा।









