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संस्कृत शिक्षा के स्वाभिमान का स्वर्णिम अध्याय: काशी विश्वनाथ मन्दिर न्यास का ऐतिहासिक सहयोग

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वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक नगरी में संस्कृत शिक्षा के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लेते हुए काशी विश्वनाथ मन्दिर न्यास ने छात्र-कल्याण को केंद्र में रखकर महत्वपूर्ण पहल की है। न्यास की हाल ही में आयोजित बैठक में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के लगभग 1800 विद्यार्थियों के लिए कक्षा-कक्षों में आवश्यक फर्नीचर की व्यवस्था हेतु ₹1,18,64,232/- (रुपये एक करोड़ अठारह लाख चौंसठ हजार दो सौ बत्तीस मात्र) की स्वीकृति प्रदान की गई। इस निर्णय को संस्कृत शिक्षा के सम्मान और विद्यार्थियों की गरिमा से जुड़ा ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार की ओर से न्यास के अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा सभी सम्मानित सदस्यों के प्रति हृदयपूर्ण आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि संस्कृत विद्यार्थियों के आत्मसम्मान और शैक्षणिक अधिकारों की प्रतिष्ठा का प्रतीक है।

कुलपति प्रो. शर्मा ने अपने संदेश में उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत लगभग 3000 विद्यार्थियों में से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ पर्याप्त उपवेशन-सुविधा के अभाव में धरातल पर बैठकर अध्ययन करने को बाध्य थे। यह स्थिति उच्च शिक्षा की गरिमा के अनुकूल नहीं थी। लंबे समय से कक्षा-कक्षों में पर्याप्त फर्नीचर की कमी के कारण विद्यार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनकी एकाग्रता और अध्ययन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यास द्वारा स्वीकृत राशि से थ्री-सीटर बेंच, सिंगल-सीटर टेबल-कुर्सियाँ तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी। इससे कक्षा-कक्षों में सुव्यवस्थित एवं अनुशासित वातावरण का निर्माण होगा और विद्यार्थियों को सम्मानजनक ढंग से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। यह व्यवस्था न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाएगी, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और मनोबल पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी।

प्रो. शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान-परम्परा का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ वेद, वेदांग, दर्शन, साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, धर्मशास्त्र और अन्य पारम्परिक विद्याओं का अध्ययन-प्रशिक्षण होता है। यहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी देश और विदेश में भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा का गौरव बढ़ा रहे हैं। ऐसे में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक थी।

उन्होंने कहा कि काशी की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक परम्परा को सुदृढ़ करने में काशी विश्वनाथ मन्दिर न्यास की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है। शिक्षा, संस्कृति और लोककल्याण के क्षेत्र में न्यास द्वारा लिए गए निर्णय समाज के लिए अनुकरणीय हैं। संस्कृत विद्यार्थियों के हित में लिया गया यह निर्णय निश्चित ही दूरगामी प्रभाव डालेगा और संस्कृत शिक्षा के उन्नयन में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने भी न्यास के इस लोकहितकारी निर्णय का स्वागत करते हुए इसे संस्कृत शिक्षा के स्वाभिमान का सशक्त आधार बताया है। विश्वविद्यालय परिवार ने एक स्वर में कहा कि यह सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा और काशी की ज्ञान-परम्परा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

अंत में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने न्यास के प्रति पुनः आभार व्यक्त करते हुए उनके सतत् लोकमंगलकारी कार्यों की निरंतर प्रगति की कामना की। संस्कृत विद्यार्थियों के शैक्षणिक सम्मान की दिशा में उठाया गया यह कदम काशी की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई ऊँचाई प्रदान करने वाला ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।

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