वाराणसी। उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी 2025–26 का आयोजन “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के अंतर्गत “वोकल फॉर लोकल” थीम पर किया जा रहा है। प्रदर्शनी का उद्देश्य स्वदेशी खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को बढ़ावा देना, लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
प्रदर्शनी में भारत सरकार एवं राज्य सरकार की योजनाओं—प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना तथा मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना—के अंतर्गत वित्तपोषित इकाइयों एवं अन्य पंजीकृत संस्थाओं द्वारा स्टॉल लगाए गए हैं। खादी वस्त्रों एवं ग्रामोद्योगी उत्पादों की यहाँ जमकर खरीदारी हो रही है, वहीं उपभोक्ता खादी पर 30 प्रतिशत छूट का लाभ भी उठा रहे हैं।
महात्मा गांधी का प्रसिद्ध कथन “खादी वस्त्र नहीं, विचार है” आज भी प्रासंगिक है। गांधीजी ने खादी को केवल वस्त्र नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना था।

प्रदर्शनी में जनपद वाराणसी सहित उत्तराखंड एवं अन्य जनपदों—प्रतापगढ़, मीरजापुर, कुशीनगर, प्रयागराज आदि—की पंजीकृत इकाइयों द्वारा कुल 125 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें 22 स्टॉल खादी तथा 103 स्टॉल ग्रामोद्योग से संबंधित हैं।
परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी यू०पी० सिंह ने बताया कि प्रदर्शनी में 22 दिसंबर 2025 तक कुल 53 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। साथ ही प्रदर्शनी में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे खरीदारी के साथ-साथ दर्शक परिवार सहित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आनंद उठा रहे हैं।









