वाराणसी। ज्ञान और संस्कृति की पावन धरती वाराणसी में शिक्षा के क्षेत्र में एक और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जब अभिषेक शिक्षा निकेतन इंग्लिश स्कूल, मधुकर नगर कॉलोनी, रूप्पनपुर, सारनाथ रोड में “प्राचीन भारत में आधुनिक भारत की भूमिका” विषय पर एक प्रभावशाली वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के विभिन्न वर्गों के छात्र-छात्राओं ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ भाग लेते हुए अपने विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति की।
प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना और यह समझ विकसित करना था कि किस प्रकार प्राचीन भारत की जीवन-दृष्टि, शिक्षा प्रणाली, वैज्ञानिक सोच और नैतिक मूल्यों ने आधुनिक भारत की संरचना को दिशा दी है। प्रतिभागियों ने अपने तर्कों में वेद-उपनिषदों की ज्ञान परंपरा, तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षाकेंद्रों, आयुर्वेद और ज्योतिष जैसे विज्ञानों तथा गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि आज का भारत इन्हीं आधारों पर तकनीकी और नैतिक विकास की ओर अग्रसर है।
विद्यार्थियों ने कहा कि प्राचीन भारत की “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना आज वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीति और सांस्कृतिक नेतृत्व का आधार बन रही है। साथ ही, योग, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन की विश्वव्यापी स्वीकृति इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों से जुड़कर ही आगे बढ़ रहा है। कई प्रतिभागियों ने डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नई शिक्षा नीति जैसी पहलों को भी प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की तार्किक क्षमता, मंच संचालन कौशल और स्पष्ट अभिव्यक्ति ने उपस्थित शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों को प्रभावित किया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के विचारों की गहराई, प्रस्तुति शैली और विषय की समझ के आधार पर परिणाम घोषित किए।
प्रतियोगिता में कक्षा तीन की छात्रा पायल कुमारी ने अपने प्रभावशाली और संतुलित तर्कों से प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने प्राचीन भारत की शिक्षा व्यवस्था और नैतिक मूल्यों को आधुनिक समाज की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए सशक्त प्रस्तुति दी। द्वितीय स्थान कक्षा तीन की वर्तिका मिश्रा को मिला, जिन्होंने भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। वहीं कक्षा छह की हर्षिता मौर्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को प्रमाणपत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
विद्यालय के प्रबंधक सच्चिदानंद सिंह देववंशी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की बौद्धिक प्रतियोगिताएं बच्चों में चिंतनशीलता, तार्किक क्षमता और आत्मविश्वास का विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत की समृद्ध परंपराओं को समझना और उन्हें आधुनिक जीवन में आत्मसात करना ही सच्चे अर्थों में प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां विद्यार्थियों के भीतर अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गौरव और आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।









