वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक धरती पर रविवार को भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब महमूरगंज स्थित बालाजी पैलेस में श्री श्याम ध्वजा शोभायात्रा समिति द्वारा 32वां निशान महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भव्यता और पारंपरिक उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और संगीतमय भजनों की मधुर धुनों पर बाबा श्याम की भक्ति में भाव-विभोर होकर झूम उठे।
महमूरगंज के रघुनाथ नगर स्थित बालाजी पैलेस में प्रातः 9 बजे ज्योत प्रज्वलन के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इसके उपरांत कटनी से पधारे नंदू भैया एवं उनके सहयोगी कलाकारों द्वारा संगीतमय हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। भक्ति-रस से सराबोर इस प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
प्रातः 11:30 बजे से भजन गंगा का शुभारंभ हुआ। मंच से प्रस्तुत एक से बढ़कर एक भजनों ने ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु अपने स्थान पर थिरकने को विवश हो गए। “हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा” और “श्याम तेरी बंसी पुकारे” जैसे लोकप्रिय भजनों पर पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। वातावरण में गूंजते “जय श्री श्याम” के उद्घोष ने काशी की पावन वायु को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान बालाजी पैलेस के ट्रस्टी मुख्य संजय लोहिया ने बताया कि विगत कई वर्षों से यह महोत्सव निरंतर आयोजित किया जा रहा है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि निशान महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
सायं 4:30 बजे से भव्य निशान शोभायात्रा का शुभारंभ बालाजी पैलेस परिसर से हुआ। रथ पर सुसज्जित बाबा श्याम की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा महमूरगंज से रथयात्रा मार्ग होते हुए लक्सा स्थित श्याम प्रभु मंदिर तक पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। केसर, गुलाल और पुष्पों की वर्षा के बीच पूरा क्षेत्र खाटू धाम जैसा अलौकिक प्रतीत हो रहा था।
शोभायात्रा के दौरान भक्तों का उत्साह चरम पर रहा। महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं, वहीं युवा वर्ग ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमता नजर आया। अनुशासन और व्यवस्था की दृष्टि से आयोजन समिति के सदस्यों ने विशेष प्रबंध किए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में आयोजन समिति के पदाधिकारियों के साथ अनुराग चांदवासिया, प्रबंध निदेशक बालाजी पैलेस सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की।
काशी की इस पावन धरा पर आयोजित 32वें निशान महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भक्ति और आस्था की परंपरा यहां केवल जीवित ही नहीं, बल्कि निरंतर विस्तार पा रही है। बाबा श्याम के जयकारों से गूंजती काशी ने श्रद्धा, विश्वास और सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।









